भेड़ और बकरी

मेरे प्रिय भाई-बहनो
आप सभी का मैं फ़िर से एक बात प्रभु यीशु मसीह के नाम में स्वागत करता हूं,

मैने बीते दिनो एक पोस्ट किया था जो मेरा सवाल था कि भेड़ और बकरी में फ़र्क के बारे में,
जिसमें से बहुत से लोगों ने बहुत ही अच्छे से वचन के माध्यम से फ़र्क को बताया,

मैं सभी का धन्यवाद करता हूँ कि आप सब ने अपने-अपने सुझाव दिये...

और मैं भी भेड़ और बकरी के बीच कुछ बातों को आपके सामने रखना चाहता हूँ, मेरी बातें थोड़ी लम्बी हो सकती है पर ये आपके फ़ायदे के लिय ही है..

👉भेड़- भेड़ एक निर्भरता(depended) को दर्शाता है, कि वो अपने चरवाहे के ऊपर पुरी तरह से निर्भर होता है, उसे ये बिश्वास होता है कि मेरा चरवाहा मुझे अच्छा खाना, अच्छी चराई, पानी वो सब मेरे लिए कर सकता है, भेड़ एक शान्त स्वाभाव का होता है, अगर कोई भेड़ के बीच में रहा है तो वो जानता होता इस बात की वो शांति महौल में रहना पसंद करता है, भेड़ की एक अच्छी बात ये भी है कि भेड़ अपने चरवाहा की आवाज को पहचानते है, और वो अपने चरवाहे के पिछे-पिछे चला करता करते हैं, इस बात को अगर हम देखना चाहते हैं तो भजन संहिता 23: को पढ़ने से ये पता चलता है कि दाऊद अपने आप को इस भेड़ के समान बताता है, जो उसके पीछे चलता, उर पर बिश्वास, उस पर पुरी तरह से निर्भर, ऐसे बहुत बातों को दाऊद भेड़ के बारे में बताता है,...

यीशु ने कुछ बातों को कहा आइये वचन से देखते हैं

अच्छा चरवाहा मैं हूँ; मैं अपनी भेड़ों को जानता हूँ, और मेरी भेड़ें मुझे जानती हैं।
यूहन्ना 10:14

उसके लिये द्वारपाल द्वार खोल देता है, और भेड़ें उसका शब्द सुनती हैं, और वह अपनी भेड़ों को नाम ले लेकर बुलाता है और बाहर ले जाता है। जब वह अपनी सब भेड़ों को बाहर निकाल चुकता है, तो उनके आगे आगे चलता है, और भेड़ें उसके पीछे पीछे हो लेती हैं, क्योंकि वे उसका शब्द पहचानती हैं। परन्तु वे पराये के पीछे नहीं जाएँगी, परन्तु उससे भागेंगी, क्योंकि वे परायों का शब्द नहीं पहचानतीं।”
यूहन्ना 10:3‭-‬5

वैसे ही एक मसीही बिश्वासी को भेड़ के रूप में कहा गया है कि मसीही विश्वासी कैसे प्रभु के पिछे  चल सकता है, एक सच्चा मसीही इस बात को जानता है कि मेरा चरवाहा मुझे सब कुछ देगा, प्रभु पर निर्भरता और बिश्वास, जैसे दाऊद कहता है कि तेरे सोते और तेरे लाठी से मुझे शान्ति का एक मतलब ये भी है कि जब हम किसी पास्टर, दास, सेवक, द्वारा वचन जो फ़टकार वाला होता है उस वचन से वो शान्त ही रहेगा, वो बुद्बुदायेगा नही, गलत नही मानेगा, बुराई नही करेगा,

एक बिश्वासी को भी भेड़ के समान शान्त ही होना चहिये...

आइये अब बकरी का वो गुण को देखते हैं...

👉बकरी- एक बकरी जो भेड़ से बिलकुल अलग होती है, वो अपने मन कि करती है, वो भड़कीली, अपने आप को सबसे बुद्धिमान समझती है, आप ने देखा होगा जब बकरी चरती है तो वो पिछे को भी भागती है, इधर-उधर मुह मारती है, अपने मुताबिक चला करना पसंद करती है, इसलिए उसे पिछे चला करता है उसका चरवाहा, कि वो उसे सही दिशा में ले जाये,.....

जैसे की कलिसियाओ में भी ऐसे बकरी वाले स्वभाव के लोग पाये जाते हैं चरवाहे द्वारा नही अपनी मन की करना चाहते है, अपने आप को कुछ ज्यादा ही बुद्धिमान, समझदार, आग्याकारी, धर्मी समझते हैं, और जो फ़ुट डालने का काम करते है, जैसे बकरी का आदत होती है जगह-जगह मुह मारना वैसे ही वैसे लोगों का भी काम होता,आज ये कलिसिया, कल वो कलिसिया,और हर ऐसे मिटिन्ग प्रोग्राम मे पाये जाते हैं.....

जिसे एक रूप हम यह भी दे सकते हैं कि वो भेड़ के रूप में भेडिया होते हैं जो लोगों को भड़काने का काम करते हैं, जो अपने ही पास्टर, दास, सेवक, परमेश्वर के विरोध मे कर देते हैं, और वो भी वचन का इस्तेमाल कर के.....

जो उस पर बिश्वास करता है वो उसकी भेड़े कहलाती है

उदाहरण-  आप विश्वास नहीं करते क्योंकि आप मेरी भेड़ें नहीं हैं. मेरी भेड़ें मेरी आवाज़ सुनती हैं. मैं उन्हें जानता हूँ और वे मेरे पीछे-पीछे चलती हैं. मैं उन्हें अनन्त काल का जीवन देता हूँ. वे कभी नाश न होंगी और कोई भी उन्हें मेरे हाथ से छीन नहीं सकता.
योहन 10:26‭-‬28

परमेश्वर आप को आशीष दे...

bro-anand



ब

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