संदेश

एक शिक्षक, अगुवा, पास्टॄर के प्रति आपका दृष्टिकोण

चित्र
जय मसीह की... मेरे प्रिय-भाई बहन आज एक और महत्वपूर्ण बात आपके सामने रखने जा रहा हूँ, आज के समय में ऐसी बहुत सी शिक्षा हमारे सामने देखने है, जो अपने आप को सही साबित करने में लगी हुई है, बहुत सी भ्रमित शिक्षा आज कलिसियाओ में पाई जाती है, लोगों को सिखाया जाता है कि आपको किसी के अधीन रहने की जरूरत नहीं, आपको किसी पास्टर, अगुवे, शिक्षक की जरूरत नहीं है, क्योंकि आपका शिक्षक पवित्रआत्मा(यूहन्ना 14:26, 1कुरि• 2:13)  है तो आपको किसी की सुनने की जरूरत नहीं... लोग (यूहन्ना 14:26 और 1कुरि• 2:13)ऐसे बहुत  से वचन का का हवाला देते हैं, और मना करते हैं कि पवित्रआत्मा को छोड़ शिक्षक, पास्टर, अगुवे के अधीन नहीं  होना है, परन्तु जब विश्‍वास आ चुका, तो हम अब शिक्षक के अधीन न रहे। गलातियों 3:25 👆👆इस वचन को लोग गलत प्रस्तुत करते हैं, जबकी ये वचन 24 में व्यवस्था के बारे में बताती है, क्योंकि विश्वास से पहले व्यवस्था हमारी शिक्षक हुई मसीह तक पहुंचने में ऐसे भरमाने वाले से बचे ये लोग आपको मसीह से  दूर ले जा रहे हैं, मसीह की देह जो कलिसिया है उसकी संगति से ...

दशवान्श और दान

चित्र
🙏जय मसीह की🙏 मेरे प्रिय भाई-बहन आज का विषय दशवान्श और दान के बारे में है मेरे प्रियो बहुत से ऐसे लोग हैं जो इस विषय पर बात करना नहीं चाहते हैं, वे हिचकिचाते है इस विषय पर बात करने से क्योंकि उन्हें अपने धन 💰 से देना न पड़ जाये पर मै आपको ये बताना चाहता हूं कि ना तो किसी चर्च और न किसी और की बातें मैं आपको बताना चाहता हूँ पर जो मैं कहना चाहता हूँ वो बाइबल से ही कहना चाहून्गा... 1➡मसीही होने के नाते हम यह समझते है कि सबकुछ परमेश्वर का है जिसमें हमारा पैसा और सम्पति भी शामिल है 2➡कलिसिया को चलाने के लिए और सुसमाचार फ़ैलाने के लिये पैसे की आवश्यकता होती है! कलिसिया को चलाने और सुसमाचार फ़ैलाने के लिए कीमत का भुगतान कौन करेगा? मसीह के अनुयायी! 3➡दशवान्श देना सिर्फ परमेश्वर की दी हूई जिम्मेदारी नहीं परंतु परमेश्वर के लोगों के लिए आशीशो का एक उपाय भी है l. दशवान्श के सिद्धात दशवान्श के सिद्धांत परमेश्वर के वचन पर अधारित है कि परमेश्वर सब चिजो का मालिक है, वह हमारे धन और सम्पति का भी अधिकारी है A. परमेश्वर सब कुछ का मालिक हैं पृथ्वी और जो कुछ उस में है यहोवा ही का है, ज...

मैं अपने पिता से दूर तो नहीं

चित्र
🙏सभी लोगों को प्रभु यीशु मसीह के नाम में जय मसीह की🙏 एक बेटा अपने पिता की तारिफ़ अपने दोस्तों के बीच, रिश्तेदारो के बीच अपने मुहल्ले में और भी बहुत से जगह में करता है, वो कहता है अपने पिता के प्रेम के बारे में कि उसका पिता उससे कितना प्रेम करता है, वो बेटा अपने पिता की हर एक वो बात जो उसका पिता उसके लिये करता है बताता रहता है, वो बेटा सारे लोगों के बीच ये कहता है कि उसका पिता उसकी हर जरूरतो को पूरा करता है, उसे जो चाहिए उसका पिता उसे लाकर देता है, वो बेटा अपने पिता कि हर एक अच्छाई को लोगों को बताया करता है, उसे अच्छा लगता अपने पिता के बारे में लोगों को बताने में, हर दिन कुछ न कुछ उस बेटे के पास होता ही है अपने पिता के बारे में  लोगों को बताने के लिए और वो लोगों के पास जाया करता है, मैं आपसे सवाल करना चाहता हूं कि वो बेटा जो अपने पिता की तारिफ़ किये थकता नहीं है क्या वो एक अच्छा बेटा हो सकता है???🤔🤔 हाँ वो एक अच्छा बेटा हो सकता है✅ जरा सोचे कि वो ही बेटा जो हर दिन अपने पिता की तारिफ़ लोगों के पास जाकर करता है वो बेटा हर दिन अपने पिता के साथ समय नही बिताता है, अपने पिता...

मनुष्य परमेश्वर को प्रकट नहीं कर सकता, परमेश्वर खुद प्रकट होता आया

चित्र
मेरे प्रिय भाई-बहन एक बात आप से कहना चाहता हूँ कि बिते दिनो मेरे एक पोस्ट में काफ़ी बहस हुई थी, जिसमें अन्य आस्था से जुड़े किसी ने ये सवाल कर दिया था कि परमेश्वर को प्रकट करो वो है तो उनका कहना था कि यीशु मर चुका है वो परमेश्वर नहीं है, परमेश्वर का कोई रूप नहीं है वो प्रकाश है, सर्वशक्तिमान मान है, ग्यानी है, उसे कोई नहीं देख सकता है, उनका सवाल था अगर वो है तो दिखाओ.... वैसे तो मैं जवाब दे सकता था पर नहीं दिया मैने इसलिये कि जब एक बात कर रहा हो तो उसके बीच में बिना उसके इज़ाज़त के आना अच्छी बात नहीं होती वरना दोनों की अलग अलग बातों को समझाने का तरिका अलग अलग होता है...तो मैं चुप रहा.. मैं अक्सर उनके सवालो से जानता हूँ कि जिस परमेश्वर की अराधना हम करते हैं उसका कोई अस्थित्व नहीं है... क्योंकि मैं वचन से प्रमाणित तो कर सकता था, लेकिन हर बार वचन का सहारा लेना ऐसे लोगों के लिए सही नहीं वरना आपके वचन को तो व्यर्थ समझेगा ही साथ ही साथ आपके द्वारा परमेश्वर के का अपमान भी होगा, वैसे लोगों ने तो परमेश्वर का अपमान तो किया ही है पर मैं ऐसा मानता हूं कि परमेश्वर के वचन जिसे हम जीवन मानते है वो...

सही और गलत का चुनाव

चित्र
जय मसीह की मेरे प्रिय भाई-बहन आज एक और नया विषय आपके सामने रख रहा हूँ... जो परमेश्वर के द्वारा एक नयी बात पता चली...प्रभु की कितना महान है, जब तो बात करता है तो सच में सुनने वाले भी उसके वचन से आनंदित और आशीषित जरूर होते हैं, मैं बहुत उत्साहित और विश्वास के साथ आपसे बात करने जा रहा हूँ...आप ध्यान से पढ़े क्योंकि परमेश्वर का आत्मा आपसे बात करने जा रहा है... मैं आपको साफ़ शब्दों में बताना चाहता हूं कि परमेश्वर और परमेश्वर का काम सही है, परमेश्वर अपना काम सही तरीके से करता है और वो चाहता है कि उसके लोग भी सही चाल और सही रिति से चले क्योंकि परमेश्वर सही है तो परमेश्वर के लोग भी सही बने... आपने बाइबल में यशायाह भविष्यवक्ता के बारे मे पढा होगा, जो कि प्रभु यीशु के जन्म से 700 साल पहले ये भविष्यवाणी की थी कि यीशु का जन्म किस प्रकार से होगा.... मैं आपको इसी पुस्तक में से एक व्यक्ति के बारे में बताने वाला हूं आप मेरी बात पर गौर करे... हम इस बात को जानते हैं कि शैतान जब स्वर्ग में परमेश्वर की अराधना करता था तो वो एक स्वर्ग्दुत था, और परमेश्वर ने उसे बहुत सुंदर भी बनाया था...जब तक वो ...

एक अच्छा पात्र बनना

चित्र
"जय मसीह की" मेरे प्रिय भाई-बहनो मैं आपके सामने एक और विषय पे  बात करने जा रहा हूँ 👉मसीह में एक अच्छा पात्र बनना मेरे प्रियो हम परमेश्वर से क्या चाहते हैं??? 60%- लोग परमेश्वर से कहते हैं मुझे दें(लेने वाले) 30%-लोग कहते हैं परमेश्वर मेरा इस्तेमाल कर. 10% -लोग कहते हैं परमेश्वर मुझे बना कि मैं काम आऊ. याद रखिये मेरे प्रियो परमेश्वर पहले बनाता है कि इस्तेमाल किया जाये या इस्तेमाल में लाया जाये परमेश्वर ने हमें चुना है कि हम परमेश्वर के लिये इस्तेमाल किये जाये, जैसे एक कुम्हार पात्र बनाने से पहले मिट्टी को चुनता है, वैसे ही परमेश्वर ने भी हमें इस्तेमाल करने  से पहले हमें बुलाया गया है कि हम चुने जाये जैसे कुम्हार मिट्टी को गुथा/साना करता है उसे दबता है कि वो नरम बन जन जाये ताकि उसे जिस आकार में ढाले उस आकार में वो धलता जाये ठिक वैसे ही परमेश्वर भी हमें पहले नम्र, दीन, दयालु, बुराई को अलग कर हमारे अंदर प्रेम को उत्पन्न करता है कि हम हर परिस्थिति में ढल सके.... जैसे. कुम्हार पात्र बनाते समय आकार दिया करता है वैसे ही परमेश्वर भी हमें उसी प्रकार बनाता है अपनी...

परमेश्वर का वचन(बाइबल) जो अब बदलती जा रही है

चित्र
जय मसीह की मेरे प्रिय भाई-बहन मैं आज आपके सामने कुछ खास विषय पर बात करने वाला हूं 👉परमेश्वर का वचन(बाइबल) हम तक पहुँची🤔?? कैसे मैं जानता हूँ कि बहुत से लोग इस बात को जानते हैं फ़िर भी मैं आपको इसके बारे में कुछ बातों को बताता चाहता हूँ अगर हम उत्पत्ति की किताब से पढना शुरू करते हैं तो पाते हैं कि परमेश्वर द्वारा संसार की सृष्टि  और कैसे मनुष्य का पापी होना और जल-प्रलय और अनेक प्रकार की भाषा और जाती बनी इसका वर्णन और अब्राहम के वंशजों को पाते हैं अगर हम नज़र डाले उत्पत्ति की किताब से तो पाते हैं कि परमेश्वर का वचन (व्यवस्था,नियम, आग्या), और वाचा को परमेश्वर द्वारा लोगों तक मौखिक रूप में दिया जाता था उन दिनों लिखने का चलन अस्थित्व में नहीं आया था... और जब निर्गमन की किताब में आते हैं तो पाते हैं कि परमेश्वर कैसे मुसा का इस्तेमाल किया अपने लोगों को मिस्र की गुलामी से निकाल लाया और मैं ऐसा मानता हूं कि मुसा के समय में लिखने का प्रचलन आ चुका था और परमेश्वर ने अपनी बातों को लिखित रूप में बदला और मुसा द्वारा पन्चग्रंथ  जिसे इब्रानी भाषा में तोराह(व्यवस्था) कहते हैं जिसम...