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मेरे प्रियो जय मसीह की...... भाई-बहनो आपने परमेश्वर के वचन को पढ़ा होगा  और पढ़ते भी हो, अध्य्यन भी करते हो अच्छी बात है. क्या आप एक बात जानते हो कि परमेश्वर ने जिन्हे चुना था जैसे अब्राहम, हनोक, मुसा, एेलिय्याह जैसे और भी थे जो परमेश्वर के संग-संग चला करते थे, न वो अपनी मर्जी से आगे और न ही पिछे चलते थे.... मुझे आपको ज्यादा समझाने की जरूरत नहीं है क्योंकि आप इस पिक्चर के मध्य्यम से समझ जाओगे.... मैं बताना चाहता हूँ कि जब एक बच्चा जब अपने पिता की उंगलियों को थाम कर चलता है तो उस बच्चे की चलते वक्त प्रतिक्रिया क्या-क्या होती होगी?🤔🤔 जैसे कि वो बच्चा चलते-चलते अपने पिता की उंगलियों छोड़कर भाग जाता होगा, कभी दौड़ता होगा, कभीचलते-चलते रुक जाता होगा, या फ़िर वो अपने पिता की चलने की गति को देखकर खुद पिता से तेज़ चलने की कोशिश करता होगा, कभी कभी साथ चलते-चलते रास्ते में कुछ आ जाये तो उसे ठोकर मार देता होगा, कभी कुदना शुरू करना है तो कभी बैठ जाता है, कभी-कभी वो पिता की उंगलियों को थामे तो रहता है पर चलना नहीं चाहता है... एक बच्चे में हम ऐसी-ऐसी बातों को देखते हैं, आप भी ए...

प्रसाद खाने और रक्षाबंधन के विषय में

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जय मसीह की मेरे प्रिय भाई-बहन जब कोई अन्य आस्था से जुड़ा व्यक्ति जब आपको प्रसाद दे खाने को तो आप क्या करते हो? आपकी प्राकिक्रिया क्या होती हैं उस समय? कुछ भाई बहन तो साफ़ इंकार कर देते हैं इसे हम नहीं ले सकते हैं, कि हमारा विश्वास इन सब में नहीं है, और कुछ भाई बहन ये सोचकर ले लेते है कि हम इसे प्रसाद के रूप में नहीं खाते इसे हम मीठाई या खाने की वस्तु के रूप में खाते है, या अपने पडोसी मित्र, से उसका दिल रखने के लिये ले लेते है की वो बुरा मान जायेगा, ऐसा सोच अक्सर देखा जाता है हम मनुष्यो में और ये सोच रखते हैं कि हम अपने पडोसी से प्रेम रकते है, पर  ये गलत है, वचन कहता है- अत: मूर्तियों के सामने बलि की हुई वस्तुओं के खाने के विषय में - हम जानते हैं कि मूर्ति जगत में कोई वस्तु नहीं, और एक को छोड़ और कोई परमेश्‍वर नहीं। यद्यपि आकाश में और पृथ्वी पर बहुत से ईश्‍वर कहलाते हैं - जैसा कि बहुत से ईश्‍वर और बहुत से प्रभु हैं - 1 कुरिन्थियों 8:4‭-‬5 तौभी हमारे लिये तो एक ही परमेश्‍वर है : अर्थात् पिता जिसकी ओर से सब वस्तुएँ हैं, और हम उसी के लिये हैं। और एक ही प्रभु है, अर्थात् यीशु ...

हर एक परमेश्वर की संतान नहीं

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"जय मसीह की" मेरे प्रियो आप के बीच एक और विषय लेकर आया हूं प्रियो, मैं आप सब से एक बात को कहना चाहता हूँ कि अगर आप सच में परमेश्वर के साथ एक रिश्ते में बंधना चाहते हैं तो आप अपने जीवन में जो भी रुकावटे है सबसे पहले उसे दूर करे, मैने देखा है ऐसे भाई-बहनो को जो कहते है कि परमेश्वर से प्रेम करते हैं और दूसरी तरह संसारिक  मोहमाया में फ़से हुए है, एक तरफ़ आप परमेश्वर के साथ रिश्ता जोड़ रहे हो और दूसरी तरफ आप संसार के अधीन हो ये कैसी परमेश्वर की सेवा है, मैने देखा है आपको बुरा लगे तो लगे पर सच है....लोगों के प्रोफ़ाइल मे फ़िल्मी सितारो की, क्रिकेटर, सिरियल्स सितारो, गायक, नेता, और भी ना जाने कैसे कैसे लोगों के तस्वीर को लगा के रखे हैं, जिससे की साफ़ देखा जा सकता है कि आपका झुकाव किससे तरफ़ है, ऐसा कर के आप साफ़ ये जताते हो कि आप अपने मन में उसे कितना महोत्व दे रहे हो, कितना आदर मान, सम्मान दे रहे हो, आप अपने हिर्दय में उसे इतना जगह दे चुके हो और वो भी आपके हिर्दय में बना चुका है, ऐसी स्थिति में आप चाहे, कर्मो से,होंठों से सेवा भक्ति से जितना परमेश्वर को खुश करना चाहो आ...

आशीष का कारण बनना

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जय यीशु मसीह की.... आज मैं जिस विषय पर बात करने वाला हूं जो कि काफ़ी विवादित और तर्क वाला होता है.... तो आईये हम उस वचन की ओर चलते हैं-  1 कुरिन्थियों 11:3-16 [3]सो मैं चाहता हूं, कि तुम यह जान लो, कि हर एक पुरूष का सिर मसीह है: और स्त्री का सिर पुरूष है: और मसीह का सिर परमेश्वर है। [4]जो पुरूष सिर ढांके हुए प्रार्थना या भविष्यद्वाणी करता है, वह अपने सिर का अपमान करता है। [5]परन्तु जो स्त्री उघाड़े सिर प्रार्थना या भविष्यद्ववाणी करती है, वह अपने सिर का अपमान करती है, क्योंकि वह मुण्डी होने के बराबर है। [6]यदि स्त्री ओढ़नी न ओढ़े, तो बाल भी कटा ले; यदि स्त्री के लिये बाल कटाना या मुण्डाना लज्ज़ा की बात है, तो ओढ़नी ओढ़े। [7]हां पुरूष को अपना सिर ढांकना उचित नहीं, क्योंकि वह परमेश्वर का स्वरूप और महिमा है; परन्तु स्त्री पुरूष की महिमा! [8]क्योंकि पुरूष स्त्री से नहीं हुआ, परन्तु स्त्री पुरूष से हुई है। [9]और पुरूष स्त्री के लिये नहीं सिरजा गया, परन्तु स्त्री पुरूष के लिये सिरजी गई है। [10]इसीलिये स्वर्गदूतों के कारण स्त्री को उचित है, कि अधिकार अपने सिर पर रखे। [11]तौभ...

मनो में स्थापित मुृर्ति

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जय मसीह की मेरे प्रियो अगर एक मसीह को मानने वाले से ये सवाल किया कि क्या आप मुर्ति पुजा करते हैं? तो उनका जवाब होगा नहीं मैं नहीं करता हूँ, अगर मैं आपको ये कहूं कि ज्यादातर मसीह पर बिश्वास करने वाला मुर्ति पुजा करता है तो आपका क्या कहना होगा? आईये बाइबल की कुछ आयतो पर ध्यान को क्रेन्द्रित करते हैं "फिर वह थोड़ा और आगे बढ़कर मुँह के बल गिरकर, और यह प्रार्थना करने लगा, “हे मेरे पिता, यदि हो सके, तो यह कटोरा* मुझसे टल जाए, फिर भी जैसा मैं चाहता हूँ वैसा नहीं, परन्तु जैसा तू चाहता है वैसा ही हो।” मत्ती 26:39 आप जानते होंगे कि ये वचन किससे विषय में है यहाँ ध्यान देने वाली बातें है कि येशु को पता था कि वो कौन सा समय आने वाला है, लेकिन येशु शरीर के भाव में था उसे घबराहट बेचैनी हुई उसे पता था जो होने वाला है उसके साथ येशु परमेश्वर के सामने अपनी इच्छा को रखता है  इसमे भी बड़ी बात ये है कि येशु अपनी इच्छा कहने के बाद भी परमेश्वर से ये कहता कि  मेरी नहीं तेरी इच्छा पुरी हो..... मेरा कहने का मतलब ये है कि जब हम परमेश्वर के सामने आते हैं तब हम अपनी इच्...

पति और पत्नी

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जय मसीह की मैने इस कैंची को अधार बना कर एक पति-पत्नी के रिश्ते को दर्शाने की कोशिश की है..... आप खुद सोचिये ये जो कैंची है इसके बीच कुछ भी आ जाये तो ये क्या करेगा? ये काटते हुए आगे बढ़ते चला जायेगा..... कैंची की धार पति-पत्नी के बिश्वास को दर्शाता है, किसी एक में भी अगर बिश्वास की कमी एक दूसरे के प्रति दिखाई तो ये जीवन ठिक तरह से चल नहीं पायेगा....न ही किसी भी परिस्थिति को ठिक तरह से हल कर पायेगा... एक दूसरे पर बिश्वास, भरोसा का होना बहुत जरूरी है, किसी भी तरह का परेशानी क्यों न हो......जो एक वैवाहिक जीवन को बर्बाद कर सकता है उसे अपने वैवाहिक जीवन में प्रबल न होने दें....पति-पत्नी दोनों ही आपसी सुझ-बूझ के द्वारा मिलकर इन सब का सामना करे..... अगर कैंची का एक भाग या फ़िर हम कहे कि पति से पत्नी या पत्नी को पति से अलग कर दिया जाये तो क्या वो एक दूसरे के बिना चल सकेंगे? वचन भी इस बात को बताता है उत्पत्ति 2:24 कि "वे दोनों एक ही तन बने रहेंगे" ये वचन सिर्फ़ शारीरिक संबंध को ही नहीं बताता है, ये वैवाहिक जीवन के हर एक पहलु को बताता है जो पति-पत्नी के बीच प्रेम बिश्वा...