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हमारा परमेश्वर कौन?

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👉जवानो के लिये ➡जवान खुद विचार कर ले कि वो किसकी उपासना करना चहता है और करता है. कौन उसे मृत्यु के बंधन से छूड़ा सकता है. कौन उसे  नया जीवन दे सकता है. कौन उसे  हर दिन एक नई आशा देता है. बाइबल बताता है कि यीशु(परमेश्वर) कहता है- "यदि तुम मुझ से प्रेम रखते हो, तो मेरी आज्ञाओं को मानोगे। यूहन्ना 14:15 तो एक तरफ़ परमेश्वर से कहते तो हो कि प्रेम करते हैं क्या उस प्रेम को आग्या के द्वारा करते हो? सभोपदेशक अध्याय 12:1 "हे जवान अपनी जवानी के दिनों में अपने सिर्जनहार(परमेश्वर) को स्मरण(याद) रख, हे जवान, अपनी जवानी में आनन्द कर, और अपनी जवानी के दिनों के मगन रह; अपनी मनमानी कर और अपनी आंखों की दृष्टि के अनुसार चल। परन्तु यह जान रख कि इन सब बातों के विषय में परमेश्वर तेरा न्याय करेगा॥ सभोपदेशक 11:9 👉जो मुझ से प्रेम रखते हैं, उन से मैं भी प्रेम रखती हूं, और जो मुझ को यत्न से तड़के उठ कर खोजते हैं, वे मुझे पाते हैं। नीतिवचन 8:17 जवानो इस वचन पर ध्यान लगाओ कि ये वचन किस बारे में कह रहा है.... अब आप खुद ही विचार करे की आप किससे प्रेम करते हो....अगर वचनरूपी परमेश्...

नये विश्वासी ध्यान दें

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मसीह में नये विश्वासी भाई बहन मैं आप से बातें कह रहा हूं, आप जरूर इस बात का ध्यान रखें }जब आप नये-नये मसीह में आते हो तो आप एक नये जनमाये बच्चे के समान होते हो, आपको प्रभु में नये मार्गदर्शन की जरूरत होती है, जो कि आपको प्रभु में बढ़ने में आपकी सहायता करे, आपको बताये, समझाये और सिखाये, ताकि आप मसीह में अपना जड़ पकड़े रहो, जब आप प्रभु में नये होते हो तो आपका जोश प्रभु में अलग अलग है, आप चाहते हो कि प्रभु को प्रसन्न करने के लिए मैं क्या ना करू, आप बहुत जोशिले और उत्साहित भी होते हो कि आप प्रभु के लिये काम करो... पर बहुतो का ऐसा ही विश्वास कुछ दिनों बाद ठंडा पड़ जाता है, क्या आप जानते हो कि ऐसा क्यों होता है? 👉इसका जवाब है: जब आपने प्रभु से मांगा कि प्रभु में बढ़ने के लिये मेरी सहायता करे....आप प्रार्थना करते भी है और प्रार्थना करवाते भी है...लेकिन अक्सर इस बात में चुक जाते हैं हमारे नये बिश्वासी भाई बहन की किसी पर भी भरोसा कर लेते हैं जो अपने आपको प्रभु में होने का दावा करता है....गलती यही पर हो जाती है....और शैतान अपना काम ऐसे लोगों के द्वारा आपके जीवन में बहुत ही तेज़ी से क...

मसीह में एक दूसरे के अंग बनो

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मेरे प्रिय भाई-बहने आप सब कैसे हो? आशा करता हूँ कि आप सब प्रभु में अच्छे भले होंगे, क्योंकि वचन भी इस कि "प्रभु में सदा आनंदित रहो" मेरे प्रियो मैं कुछ बातों को आपके सामने रखना चाहता हूँ जैसा कि निचे वचन में लिखा है कि मसीह में एक देह होकर आपस में एक दूसरे के अंग है... मैं कहना ये चाहता हूँ कि जैसे हमारे देह में अलग-अलग अंग है और इनके काम करने का तरिका भी एक दूसरे से अलग है, पर ये अंग एक दूसरे के विरोध में नहीं है, और ये एक दूसरे की सहायता भी करते हैं... लेकिन हम भी तो मसीह में एक दूसरे के अंग है, तो हमारा विचार काम करने का तरिका एक दूसरे से अलग हो सकते हैं, पर हमें बात-बात में किसी का विरोध नही करना चाहिये, हमें एक दूसरे की सह लेनी चाहिये, मदद करनी चाहिए, क्युन्कि हम मसीह में एक दूसरे के अंग कहलाते है, हम अपने शरीर के अंगों से सीख सकते हैं, कि कैसे वो काम करता है बिना किसी का विरोध किये, और ये एक दूसरे से जुड़े हुए हैं, और  सम्पूर्ण शरीर बनता है, हम जब कभी भी किसी से बात करते हैं तो हमें इस बात का ध्यान जरूर रखना चाहिए कि जब बताने या समझाने की बात होती है तो सब की...