अनजाने में होनेवाली गलतियां
कभी कभी हम गलत का साथ दे देते हैं जो कि कभी-कभी हमें पता भी नही चलता है
जैसे कि- फ़ेसबुक और व्हाटअप को ले लेते हैं, हम बहुत बार बहुत सी गलत पोस्ट, या कमेंट्स को #लाईक दे देते हैं, मतलब की हम उसे पसंद कर रहे हैं, उस बुराई का हम साथ दे रहे हैं, किसी के गलत कमेंट्स का भी हम साथ देते हैं लाईक करते हैं, और तो और समजाने की बजाय हम अपने जवाब देकर उसकी सराहना(तारीफ़) करते हैं,
बहुत बार मैने भी किया है, आप ने देखा भी होगा,
हम तो जन्म से पापी है तो पाप का स्वभाव तो हमारे अंदर होगा ही, तो ऐसे-ऐसे लक्ष्मण तो दिखेन्गे ही हमारे में...किसी का मज़ाक बना देते हैं बातों बातों में...फ़नी वीडियो, जोक्स, को एक दूसरे को #send करने में बड़ा मज़ा आता है, हंसते है हंसाते है, किसी का कोई मज़ाज बना रहा होता हुआ देख बड़ा मज़ा लेते हैं, घर पर या अपने दोस्तों के बीच हमारे नाम बड़े मश्हूर होते हैं, मुझे भी दोस्तों ने बहुत से नाम दिये है, मैने भी रखे है दोस्तों के नाम, जो मन मे आया रख दिया
जब हम सहभागिता रखते हैं चर्च में, घर में, स्कुल, कॉलेज,ऑफिस, दोस्तो के बीच तो कभी कभी किसी के खुबसुरती को लेकर, पहनावा को लेकर,खाने को लेकर, शरीर को लेकर भी मज़ाक बन जाये है या बनाते हैं....भले ही हम इस बात का बुरा नही मानते हो पर हम अपने मुह के द्वारा गलत कर जाते हैं, किसी का किसी भी बात पर बार-बार हँसना,मज़ाक बनाना एक मसीही जीवन की चाल तो नही हो सकती ना!
क्योंकि लोग हमें पढते है लोग हमारी इन हरकतो पर ध्यान देते हैं, हमें ताकते है,
.हमें हर दिन अपने आप को नया बनाने की जरूरत है, हमें हर दिन परमेश्वर के सामने अपने पापो का पश्चाताप करना जरूरी है,
क्योंकि एक ही मुह से हम परमेश्वर का धन्यवाद तो करते हैं और उसी मुह के द्वारा हम कुछ और भी करते हैं...
हसने हसाने में बुराई नही है, लेकिन हमारा हसना और हसारा किस स्तर पर है इसे भी जँचना बहुत जरूरी है....
लैव्यवस्था 5:17-18
और यदि कोई ऐसा पाप करे, कि उन कामों में से जिन्हें यहोवा ने मना किया है किसी काम को करे, तो चाहे वह उसके अनजाने में हुआ हो, तौभी वह दोषी ठहरेगा, और उसको अपने अधर्म का भार उठाना पड़ेगा। इसलिये वह एक निर्दोष मेढ़ा दोषबलि करके याजक के पास ले आए, वह उतने दाम का हो जितना याजक ठहराए, और याजक उसके लिये उसकी उस भूल का जो उसने अनजाने में की हो प्रायश्चित्त करे, और वह क्षमा किया जाएगा।
अब हम सब इस बात को तो भली-भाँति जानते हैं कि व्यवस्था के अनुसार कौन निर्दोष मेमना के रूप में हमारे पापो के लिय बलिदान किया गया,
क्रुस पर तो ये मेमेना रूपी बलिदान तो खत्म किया गया था, पर हमारा रोज़ का पाप का होंठों रूपी बलिदान का क्या?
हम यीशु पर बिश्वास लाते है तो धन्यवाद की भेंट, हर दिन का क्रुस,अपने हर पापो का पश्चाताप चाहे जाने अनजाने में करते है अंगीकार करना जरूरी है....
हमें अपने पाप के स्वभाव को मारना(दबाना) और परमेश्वर के आत्मिक स्वभाव के अनुसार जीवन जीना होगा....
क्योंकि लिखा है " शरीर आत्मा के विरोध में और आत्मा शरीर के विरोध में है ये दोनो एक दुसरे के विरोधी है,
अगर शरीर अनुसार दिन काटते है ति हम निश्चय ही मरेन्गे, पर आत्मा अनुसार चलेन्गे तो अनंत जीवन हमारा होगा,
यदि आत्मा अनुसार चलते है तो शरीर की लालसा किसी रिति से पुरी नहीं कर पाओगे...
GOD BLESS U
parmeshwarpremhai123.blogspot.com

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