आशीष का कारण बनना
जय यीशु मसीह की....
आज मैं जिस विषय पर बात करने वाला हूं जो कि काफ़ी विवादित और तर्क वाला होता है....
तो आईये हम उस वचन की ओर चलते हैं-
1 कुरिन्थियों 11:3-16
[3]सो मैं चाहता हूं, कि तुम यह जान लो, कि हर एक पुरूष का सिर मसीह है: और स्त्री का सिर पुरूष है: और मसीह का सिर परमेश्वर है।
[4]जो पुरूष सिर ढांके हुए प्रार्थना या भविष्यद्वाणी करता है, वह अपने सिर का अपमान करता है।
[5]परन्तु जो स्त्री उघाड़े सिर प्रार्थना या भविष्यद्ववाणी करती है, वह अपने सिर का अपमान करती है, क्योंकि वह मुण्डी होने के बराबर है।
[6]यदि स्त्री ओढ़नी न ओढ़े, तो बाल भी कटा ले; यदि स्त्री के लिये बाल कटाना या मुण्डाना लज्ज़ा की बात है, तो ओढ़नी ओढ़े।
[7]हां पुरूष को अपना सिर ढांकना उचित नहीं, क्योंकि वह परमेश्वर का स्वरूप और महिमा है; परन्तु स्त्री पुरूष की महिमा!
[8]क्योंकि पुरूष स्त्री से नहीं हुआ, परन्तु स्त्री पुरूष से हुई है।
[9]और पुरूष स्त्री के लिये नहीं सिरजा गया, परन्तु स्त्री पुरूष के लिये सिरजी गई है।
[10]इसीलिये स्वर्गदूतों के कारण स्त्री को उचित है, कि अधिकार अपने सिर पर रखे।
[11]तौभी प्रभु में न तो स्त्री बिना पुरूष और न पुरूष बिना स्त्री के है।
[12]क्योंकि जैसे स्त्री पुरूष से है, वैसे ही पुरूष स्त्री के द्वारा है; परन्तु सब वस्तुएं परमेश्वर से हैं।
[13]तुम आप ही विचार करो, क्या स्त्री को उघाड़े सिर परमेश्वर से प्रार्थना करना सोहता है?
[14]क्या स्वाभाविक रीति से भी तुम नहीं जानते, कि यदि पुरूष लम्बे बाल रखे, तो उसके लिये अपमान है।
[15]परन्तु यदि स्त्री लम्बे बाल रखे; तो उसके लिये शोभा है क्योंकि बाल उस को ओढ़नी के लिये दिए गए हैं।
[16]परन्तु यदि कोई विवाद करना चाहे, तो यह जाने कि न हमारी और न परमेश्वर की कलीसियों की ऐसी रीति है॥
अब आप समझ ही गये होंगे कि मैं किस बारे में बात करने वाला हूं,
आज जो बात मैं आपको बताने जा रहा हूँ, इसमे बहुत से मेरे विरोध में भी होंगे.....
सिर
👉प्रेरित पौलुस मसीह के अनुयायियो का वर्णन "मसीह की देह के रूप में करता है,
1 कुरिन्थियों 12:12-13,27
[12]क्योंकि जिस प्रकार देह तो एक है और उसके अंग बहुत से हैं, और उस एक देह के सब अंग, बहुत होने पर भी सब मिलकर एक ही देह हैं, उसी प्रकार मसीह भी है।
पौलुस गलातियो 3:28 कहता है-
गलातियों 3:28
[28]अब न कोई यहूदी रहा और न यूनानी; न कोई दास, न स्वतंत्र; न कोई नर, न नारी; क्योंकि तुम सब मसीह यीशु में एक हो।
यहाँ तक कि स्त्री और पुरुष दोनों मसीह में एक है,
फ़िर भी पौलुस ने कुरिन्थियो की कलीसिया को यहूदी शास्त्रो से प्रथम स्त्री के बारे में बताया कि वह एक पुरुष के देह से निकाल कर बनाईं गई थी (उत्पत्ति 1:26; 2:18-25)
वचन 11:6
यहाँ पौलुस कुरिन्थियो की कलीसिया को तर्क देता है जब कभी स्त्रीयाँ स्वर्जनिक स्थल पर प्रार्थना/अराधना करे तब वे य तो अपने सिर के बालों को अच्छी तरह से सवार कर रखे य किसी तरिके दे ढाक कर रखे......क्योंकि प्राचीन यहूदी सभ्यता के अनुसार बिना बाल सवारे अर्थात् सिर के खुले बालो कि समानता व्यविचार और वेश्याव्रिति से की जाती थी....पौलुस 11:10 में यही तर्क दे रहा है,
एक स्त्री जो प्रार्थना/अराधना/भविष्यवाणी करती है उसे अपने सिर के बालों को ढक कर रखना आवश्यक है ताकि यह दूसरों और स्वर्गदूतो के लिए यह चिन्ह हो सके कि उसके पास ऐसा करने का "अधिकार" है और इसके अराधना सभा में बधा नहीं पहुचेगी...इफ़िसियो 3:10 और 1तीमुथिय्युस 5:21 कहता है-
इफिसियों 3:10
[10]ताकि अब कलीसिया के द्वारा, परमेश्वर का नाना प्रकार का ज्ञान, उन प्रधानों और अधिकारियों पर, जो स्वर्गीय स्थानों में हैं प्रगट किया जाए।
1 तीमुथियुस 5:21
[21]परमेश्वर, और मसीह यीशु, और चुने हुए स्वर्गदूतों को उपस्थित जान कर मैं तुझे चितौनी देता हूं कि तू मन खोल कर इन बातों को माना कर, और कोई काम पक्षपात से न कर।
ये वचन सम्बन्धित बातें और मैं कुछ बताना हूं....
ध्यान दे 11:16 वचन को पढ़े
1 कुरिन्थियों 11:16
[16]परन्तु यदि कोई विवाद करना चाहे, तो यह जाने कि न हमारी और न परमेश्वर की कलीसियों की ऐसी रीति है॥
ये जो सिर ढकने की बातें है न पौलुस अपनी और न परमेश्वर की कलीसिया की ऐसी रिति है....वहाँ साफ़ कर दिया पौलुस ने इस बात को.....यहूदी सभ्यता में ऐसा करना व्यविचार और वेश्यावृत्ति माना जाता है.....
जरा सोचिये हर देश की अपनी अपनी सभ्यता है.....अमेरिका,जापान, इंग्लैंड,जैसे देशों की स्त्री आत्मिक नहीं होती क्या....क्या उन्हे भी उचित है सिर को ढकना......
एक और बात परमेश्वर को हम पिता कहते हैं, और एक पिता के सामने उसकी सिर ढककर आयेगी तब ही पिता उसे प्यार करेगा क्या?
पिता मन को जाँचने वाला परमेश्वर है.....इसलिये बार बार वचन में कहा जाता है कि मन फ़िराओ,
आपको लगता है कि आपको परमेश्वर पिता के सामने सिर ढक कर आना चाहिए तो आप आ सकते हैं, ये आप और परमेश्वर के बीच की बातें है......जब आप परमेश्वर के अधीन होते हो तो आपको किसी बंधन में रहने की आव्श्यक्ता नहीं है, जोर जबरदस्ती से आप सिर ढक कर आप परमेश्वर को खुश नहीं कर सकते हो, ऐसे तो परमेश्वर को खुश नहीं रिति रिवाजो का पालन कर रहे हो.....
पिता आपको हर रूप में किसी भी परिस्थिति मे आपको स्वीकार सकता है, पर सच्चे मन से उसके सम्मुख आना होगा......
आप अपनी तुलना किसी के साथ मत किजिये...मत देखिये सामने वाले को....आप अपना ध्यान परमेश्वर की तरफ़ केन्द्रित करे....
ऐसा भी नहीं होना चहिये कि आपका पहनावा, बालों का आकार या जो कुछ भी आप करे वो आपत्तिजनक हो......एक विश्वासी स्त्री को कैसे रहना चहिये वो वचन अनुसार अपने आपको सजा और सवार सकती है......
वो न किसी के लिय ठोकर का कारण बनेगी और न किसी को अपने तरफ़ आकर्षित करेगी.....
मेरे मसीह भाईयो आप भी अपने आप को बदलो हर बार हमारे मसीह बहनो को वचनो के द्वारा कोसा न करो.....अगर कोई बहन गलत कर रही है तो उन्हे प्यार से बताओ न कि उसे रोस दिलाओ.....ऐसा कर के कहिं हम उस बहन से विश्वास को न ठंडा कर दे.....भाईयो आप भी अपने पहनावे, स्टाईल,लूक इस सब से मसीही बहनो को अपने तरफ़ आकर्षित न करो....आशीष और उद्धार का कारण बनो.....
प्रभु आपको आशिषीत करे
भाई- आनंद
parmeshwarpremhai123.blogspot.com
आज मैं जिस विषय पर बात करने वाला हूं जो कि काफ़ी विवादित और तर्क वाला होता है....
तो आईये हम उस वचन की ओर चलते हैं-
1 कुरिन्थियों 11:3-16
[3]सो मैं चाहता हूं, कि तुम यह जान लो, कि हर एक पुरूष का सिर मसीह है: और स्त्री का सिर पुरूष है: और मसीह का सिर परमेश्वर है।
[4]जो पुरूष सिर ढांके हुए प्रार्थना या भविष्यद्वाणी करता है, वह अपने सिर का अपमान करता है।
[5]परन्तु जो स्त्री उघाड़े सिर प्रार्थना या भविष्यद्ववाणी करती है, वह अपने सिर का अपमान करती है, क्योंकि वह मुण्डी होने के बराबर है।
[6]यदि स्त्री ओढ़नी न ओढ़े, तो बाल भी कटा ले; यदि स्त्री के लिये बाल कटाना या मुण्डाना लज्ज़ा की बात है, तो ओढ़नी ओढ़े।
[7]हां पुरूष को अपना सिर ढांकना उचित नहीं, क्योंकि वह परमेश्वर का स्वरूप और महिमा है; परन्तु स्त्री पुरूष की महिमा!
[8]क्योंकि पुरूष स्त्री से नहीं हुआ, परन्तु स्त्री पुरूष से हुई है।
[9]और पुरूष स्त्री के लिये नहीं सिरजा गया, परन्तु स्त्री पुरूष के लिये सिरजी गई है।
[10]इसीलिये स्वर्गदूतों के कारण स्त्री को उचित है, कि अधिकार अपने सिर पर रखे।
[11]तौभी प्रभु में न तो स्त्री बिना पुरूष और न पुरूष बिना स्त्री के है।
[12]क्योंकि जैसे स्त्री पुरूष से है, वैसे ही पुरूष स्त्री के द्वारा है; परन्तु सब वस्तुएं परमेश्वर से हैं।
[13]तुम आप ही विचार करो, क्या स्त्री को उघाड़े सिर परमेश्वर से प्रार्थना करना सोहता है?
[14]क्या स्वाभाविक रीति से भी तुम नहीं जानते, कि यदि पुरूष लम्बे बाल रखे, तो उसके लिये अपमान है।
[15]परन्तु यदि स्त्री लम्बे बाल रखे; तो उसके लिये शोभा है क्योंकि बाल उस को ओढ़नी के लिये दिए गए हैं।
[16]परन्तु यदि कोई विवाद करना चाहे, तो यह जाने कि न हमारी और न परमेश्वर की कलीसियों की ऐसी रीति है॥
अब आप समझ ही गये होंगे कि मैं किस बारे में बात करने वाला हूं,
आज जो बात मैं आपको बताने जा रहा हूँ, इसमे बहुत से मेरे विरोध में भी होंगे.....
सिर
👉प्रेरित पौलुस मसीह के अनुयायियो का वर्णन "मसीह की देह के रूप में करता है,
1 कुरिन्थियों 12:12-13,27
[12]क्योंकि जिस प्रकार देह तो एक है और उसके अंग बहुत से हैं, और उस एक देह के सब अंग, बहुत होने पर भी सब मिलकर एक ही देह हैं, उसी प्रकार मसीह भी है।
पौलुस गलातियो 3:28 कहता है-
गलातियों 3:28
[28]अब न कोई यहूदी रहा और न यूनानी; न कोई दास, न स्वतंत्र; न कोई नर, न नारी; क्योंकि तुम सब मसीह यीशु में एक हो।
यहाँ तक कि स्त्री और पुरुष दोनों मसीह में एक है,
फ़िर भी पौलुस ने कुरिन्थियो की कलीसिया को यहूदी शास्त्रो से प्रथम स्त्री के बारे में बताया कि वह एक पुरुष के देह से निकाल कर बनाईं गई थी (उत्पत्ति 1:26; 2:18-25)
वचन 11:6
यहाँ पौलुस कुरिन्थियो की कलीसिया को तर्क देता है जब कभी स्त्रीयाँ स्वर्जनिक स्थल पर प्रार्थना/अराधना करे तब वे य तो अपने सिर के बालों को अच्छी तरह से सवार कर रखे य किसी तरिके दे ढाक कर रखे......क्योंकि प्राचीन यहूदी सभ्यता के अनुसार बिना बाल सवारे अर्थात् सिर के खुले बालो कि समानता व्यविचार और वेश्याव्रिति से की जाती थी....पौलुस 11:10 में यही तर्क दे रहा है,
एक स्त्री जो प्रार्थना/अराधना/भविष्यवाणी करती है उसे अपने सिर के बालों को ढक कर रखना आवश्यक है ताकि यह दूसरों और स्वर्गदूतो के लिए यह चिन्ह हो सके कि उसके पास ऐसा करने का "अधिकार" है और इसके अराधना सभा में बधा नहीं पहुचेगी...इफ़िसियो 3:10 और 1तीमुथिय्युस 5:21 कहता है-
इफिसियों 3:10
[10]ताकि अब कलीसिया के द्वारा, परमेश्वर का नाना प्रकार का ज्ञान, उन प्रधानों और अधिकारियों पर, जो स्वर्गीय स्थानों में हैं प्रगट किया जाए।
1 तीमुथियुस 5:21
[21]परमेश्वर, और मसीह यीशु, और चुने हुए स्वर्गदूतों को उपस्थित जान कर मैं तुझे चितौनी देता हूं कि तू मन खोल कर इन बातों को माना कर, और कोई काम पक्षपात से न कर।
ये वचन सम्बन्धित बातें और मैं कुछ बताना हूं....
ध्यान दे 11:16 वचन को पढ़े
1 कुरिन्थियों 11:16
[16]परन्तु यदि कोई विवाद करना चाहे, तो यह जाने कि न हमारी और न परमेश्वर की कलीसियों की ऐसी रीति है॥
ये जो सिर ढकने की बातें है न पौलुस अपनी और न परमेश्वर की कलीसिया की ऐसी रिति है....वहाँ साफ़ कर दिया पौलुस ने इस बात को.....यहूदी सभ्यता में ऐसा करना व्यविचार और वेश्यावृत्ति माना जाता है.....
जरा सोचिये हर देश की अपनी अपनी सभ्यता है.....अमेरिका,जापान, इंग्लैंड,जैसे देशों की स्त्री आत्मिक नहीं होती क्या....क्या उन्हे भी उचित है सिर को ढकना......
एक और बात परमेश्वर को हम पिता कहते हैं, और एक पिता के सामने उसकी सिर ढककर आयेगी तब ही पिता उसे प्यार करेगा क्या?
पिता मन को जाँचने वाला परमेश्वर है.....इसलिये बार बार वचन में कहा जाता है कि मन फ़िराओ,
आपको लगता है कि आपको परमेश्वर पिता के सामने सिर ढक कर आना चाहिए तो आप आ सकते हैं, ये आप और परमेश्वर के बीच की बातें है......जब आप परमेश्वर के अधीन होते हो तो आपको किसी बंधन में रहने की आव्श्यक्ता नहीं है, जोर जबरदस्ती से आप सिर ढक कर आप परमेश्वर को खुश नहीं कर सकते हो, ऐसे तो परमेश्वर को खुश नहीं रिति रिवाजो का पालन कर रहे हो.....
पिता आपको हर रूप में किसी भी परिस्थिति मे आपको स्वीकार सकता है, पर सच्चे मन से उसके सम्मुख आना होगा......
आप अपनी तुलना किसी के साथ मत किजिये...मत देखिये सामने वाले को....आप अपना ध्यान परमेश्वर की तरफ़ केन्द्रित करे....
ऐसा भी नहीं होना चहिये कि आपका पहनावा, बालों का आकार या जो कुछ भी आप करे वो आपत्तिजनक हो......एक विश्वासी स्त्री को कैसे रहना चहिये वो वचन अनुसार अपने आपको सजा और सवार सकती है......
वो न किसी के लिय ठोकर का कारण बनेगी और न किसी को अपने तरफ़ आकर्षित करेगी.....
मेरे मसीह भाईयो आप भी अपने आप को बदलो हर बार हमारे मसीह बहनो को वचनो के द्वारा कोसा न करो.....अगर कोई बहन गलत कर रही है तो उन्हे प्यार से बताओ न कि उसे रोस दिलाओ.....ऐसा कर के कहिं हम उस बहन से विश्वास को न ठंडा कर दे.....भाईयो आप भी अपने पहनावे, स्टाईल,लूक इस सब से मसीही बहनो को अपने तरफ़ आकर्षित न करो....आशीष और उद्धार का कारण बनो.....
प्रभु आपको आशिषीत करे
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