मनो में स्थापित मुृर्ति

जय मसीह की


मेरे प्रियो अगर एक मसीह को मानने वाले से ये सवाल किया कि क्या आप मुर्ति पुजा करते हैं? तो उनका जवाब होगा नहीं मैं नहीं करता हूँ,


अगर मैं आपको ये कहूं कि ज्यादातर मसीह पर बिश्वास करने वाला मुर्ति पुजा करता है तो आपका क्या कहना होगा?


आईये बाइबल की कुछ आयतो पर ध्यान को क्रेन्द्रित करते हैं


"फिर वह थोड़ा और आगे बढ़कर मुँह के बल गिरकर, और यह प्रार्थना करने लगा, “हे मेरे पिता, यदि हो सके, तो यह कटोरा* मुझसे टल जाए, फिर भी जैसा मैं चाहता हूँ वैसा नहीं, परन्तु जैसा तू चाहता है वैसा ही हो।”

मत्ती 26:39


आप जानते होंगे कि ये वचन किससे विषय में है

यहाँ ध्यान देने वाली बातें है कि येशु को पता था कि वो कौन सा समय आने वाला है,


लेकिन येशु शरीर के भाव में था उसे घबराहट बेचैनी हुई उसे पता था जो होने वाला है उसके साथ

येशु परमेश्वर के सामने अपनी इच्छा को रखता है 

इसमे भी बड़ी बात ये है कि येशु अपनी इच्छा कहने के बाद भी परमेश्वर से ये कहता कि  मेरी नहीं तेरी इच्छा पुरी हो.....


मेरा कहने का मतलब ये है कि जब हम परमेश्वर के सामने आते हैं तब हम अपनी इच्छा परमेश्वर के सामने लाते है, पर ये नहीं जानना चाह्ते है कि हमारी इच्छा में परमेश्वर की इच्छा है भी कि नहीं


परमेश्वर मुझे इंजीनियर बनना है

परमेश्वर मुझे एयर होस्टेस बनना है

परमेश्वर मुझे सिंगर बनना है

परमेश्वर मुझे ये नौकरी करनी है

परमेश्वर मुझे क्रिकेटर बनना है

परमेश्वर मुझे उस लड़के से शादी करनी है

परमेश्वर मुझे इस लड़की से शादी करनी है

परमेश्वर इस बार मेरा इंटरव्यु में पास करा दो

परमेश्वर मेरे बच्चों को इस स्कुल में पढाना चाहता हूं

परमेश्वर मुझे आर्मी, नेवी, एयरकाफ़्ट और ना जाने कितने ऐसे बातें हो है जिसे हम अपने मनो में  बसाये रखते है, हमारे मन, हिर्दय, सोच हर जगह इन सबको पाने की लालसा रखते हैं, मनो में हिर्दय हम इसे एक मुर्ति के समान बसा लेते हैं,


कुछ भी हो जाये हमें ये चाहिए ही चाहिए

क्योंकि हमने उस जगह जहाँ परमेश्वर वास करना चाहता है वहाँ पर हम अपनी इच्छा की मुर्ति को स्थापित कर के उसकी उपासना करना शुरू कर देते हैं,


अक्सर ये सोचते हैं कि हम परमेश्वर की उपासना और उसकी आराधना कर रहे हैं पर कहिं न कहिं हम परमेश्वर की नहीं अपने इच्छा/मन की मुरत की उपसना करते हैं...


मन की मुरत के बारे में वचन कहता है-


इसलिए तू उनसे कह, प्रभु यहोवा यह कहता है : इस्राएल के घराने में से जो कोई अपनी मूर्तियाँ अपने मन में स्थापित करके, और अपने अधर्म की ठोकर अपने सामने रखकर भविष्यद्वक्ता के पास आए, उसको, मैं यहोवा, उसकी बहुत सी मूरतों के अनुसार ही उत्तर दूँगा,

यहेजकेल 14:4


आपने कभी देखा होगा कि जब कभी हम अपने मन की मुरत को लिये परमेश्वर के सामने आते है तो प्रभु के दास के द्वारा परमेश्वर आपको जवाब देता है, जो आपनी इच्छा है वो पुरी होने जा रही है, जब भीड़ से आपका नाम पुकारा जाता और आपको आपके सवालो का जवाब मिलता है तो आप बहुत खुश हो जाते हो....


फ़िर क्या होता है कुछ साल सब सब कुछ बर्बाद हो जाता है क्यों? आपने सोचा कभी


आपने जो मांगा था वो तो आपको मिल गया था परमेश्वर से फ़िर अब परमेश्वर को क्यों कोसते हो

फ़िर क्यों दया सहायता सबकुछ ठीक करने की प्रार्थना करते हो....


जब ऐसा होता है न तो इस बारे भी परमेश्वर का वचन कुछ कहता है-


जिससे इस्राएल का घराना, जो अपनी मूर्तियाँ के द्वारा मुझे त्याग कर दूर हो गया है, उन्हें मैं उन्हीं के मन के द्वारा फँसाऊँगा।

यहेजकेल 14:5


देखिये परमेश्वर क्या कहता है, जो परमेश्वर से ज्यदा अपनी इच्छा से प्रेम रखता है, जिसने परमेश्वर छोड़ दिया वो परमेश्वर आपकी ही इच्छा के अनुसार आपको जवाब देगा..


आप इस वचन को अच्छे से अध्य्यन करे


यहेजकेल 14:3-7

"हे मनुष्य के सन्तान, इन पुरुषों ने तो अपनी मूरतें अपने मन में स्थापित की, और अपने अधर्म की ठोकर अपने सामने रखी है; फिर क्या वे मुझसे कुछ भी पूछने पाएँगे? इसलिए तू उनसे कह, प्रभु यहोवा यह कहता है : इस्राएल के घराने में से जो कोई अपनी मूर्तियाँ अपने मन में स्थापित करके, और अपने अधर्म की ठोकर अपने सामने रखकर भविष्यद्वक्ता के पास आए, उसको, मैं यहोवा, उसकी बहुत सी मूरतों के अनुसार ही उत्तर दूँगा, जिससे इस्राएल का घराना, जो अपनी मूर्तियाँ के द्वारा मुझे त्याग कर दूर हो गया है, उन्हें मैं उन्हीं के मन के द्वारा फँसाऊँगा। "इसलिए इस्राएल के घराने से कह, प्रभु यहोवा यह कहता है : फिरो और अपनी मूर्तियाँ को पीठ के पीछे करो; और अपने सब घृणित कामों से मुँह मोड़ो। क्योंकि इस्राएल के घराने में से और उसके बीच रहनेवाले परदेशियों में से भी कोई क्यों न हो, जो मेरे पीछे हो लेना छोड़कर अपनी मूर्तियाँ अपने मन में स्थापित करे, और अपने अधर्म की ठोकर अपने सामने रखे, और तब मुझसे अपनी कोई बात पूछने के लिये भविष्यद्वक्ता के पास आए, तो उसको मैं यहोवा आप ही उत्तर दूँगा।


जो परमेश्वर की इच्छा को नहीं नहीं पर अपनी इच्छा पर चलता है परमेश्वर क्या करता आप देख सकते हो


आज ज्यादातर मसीहीयो में यह मन वाली मुरत को बसा अपने मन में बसा रखा है....


आज लोग अपने आप से इतना प्रेम रकने लगे हैं कि खुद अपनी ही मुरत को मन में बसा रखा है


आज सेल्फ़ी का जमाना है लोग अपने आप इतना खो गये हैं अपनी ही उपासना करते हैं सेल्फ़ी ले ले कर अपने आप को ही खुश करने में लगे हुए हैं.....सेल्फ़ी के चक्कर में सेल्फ़िश होते जा रहे है


मेरे प्रियो आज भी समय है अपने आपको बदलो

परमेश्वर की इच्छा को जानो...परमेश्वर की बुलाहट में कोई न कोई योजना है परमेश्वर की...आप परमेश्वर के विरोध में कोई काम करो


प्रभु आपको वचन के द्वारा अपनी बुद्धि के द्वारा से आपसे बात करे


"आमीन"


भाई- आनंद लाल


टाटानगर, जमशेद्पुर
parmeshwarpremhai123.blogspot.com

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