नूह के दिनों का जल-प्रलय और अंत के दिनों में होने वाली घटना जो बाइबल हमें पहले से बताया करती है
जय मसीह की
आज मैं आपके सामने संसार की उत्पत्ति और कुछ घटना को देखेंगे जो परमेश्वर द्वारा की गई थी और होने वाली है..
ये आपको पता ही होगा की परमेश्वर ने दुसरे दिन क्या किया ?🤔
उत्पत्ति 1:6-8
फिर परमेश्वर ने कहा*, "जल के बीच एक ऐसा अन्तर हो कि जल दो भाग हो जाए।" तब परमेश्वर ने एक अन्तर करके उसके नीचे के जल और उसके ऊपर के जल को अलग-अलग किया; और वैसा ही हो गया। और परमेश्वर ने उस अन्तर को आकाश कहा। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार दूसरा दिन हो गया।
फिर परमेश्वर ने कहा*, "जल के बीच एक ऐसा अन्तर हो कि जल दो भाग हो जाए।" तब परमेश्वर ने एक अन्तर करके उसके नीचे के जल और उसके ऊपर के जल को अलग-अलग किया; और वैसा ही हो गया। और परमेश्वर ने उस अन्तर को आकाश कहा। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार दूसरा दिन हो गया।
जैसा कि हम जानते हैं कि परमेश्वर ने जल को दो भाग किया जिसमे निचे के जल से उपर के जल में अंतर कर अलग किया, लेकिन उपर का जल गया कहा जिसे परमेश्वर ने आकाश कहा🤔🤔🤔🤔
मैं आपको बताना चाहता हूँ कि जिस जल को परमेश्वर ने आकाश कहा था वो जल वायुमण्डल मे रह गया, जिसने तरह-तरह के गैस पाये जाते हैं, मतलब वो हवा में रह गया,
और परमेश्वर ने इसका इस्तेमाल नुह के दिनों में किया.
अगर हम नज़र डाले उत्पत्ति 2:5 वचन में तो वहाँ इस प्रकार लिखा है
तब मैदान का कोई पौधा भूमि पर न था, और न मैदान का कोई छोटा पेड़ उगा था, क्योंकि यहोवा परमेश्वर ने पृथ्वी पर जल नहीं बरसाया था, और भूमि पर खेती करने के लिये मनुष्य भी नहीं था। लेकिन कुहरा पृथ्वी से उठता था जिससे सारी भूमि सिंच जाती थी।
उत्पत्ति 2:5-6
उत्पत्ति 2:5-6
इस वचन के आधार पर ये समझा जा सकता है कि नुह के दिनों में जल प्रलय से पहले पृथ्वी पर कभी बारिश नहीं हुई थी और न ही कोई बारिश को देखा और न ही कोई जानता होगा की बारिश क्या होती है...
जब उत्पत्ति 6:14 देखते है कि परमेश्वर ने नुह से कहा था कि किस प्रकार से जहाज कि बनाना है
और ये भी कहा था कि कैसे नाश करून्गा इस पृथ्वी को
और ये भी कहा था कि कैसे नाश करून्गा इस पृथ्वी को
जरा सोचिये जब नुह जहाज बना रहा होगा तो हो सकता है कि वो जगह रेगिस्तान हो और लोगों ने और सगे संबंधी ने नुह से से सवाल किया होगा कि तु ये क्या बना रहा है, चलो मान भी लिया जाये कि लोगों को ये पता होगा कि ये जहाज है तो भी नूह का मज़ाक बनाया गया होगा कि यहाँ कहाँ जल-प्रलय आयेगा,
नूह ने लोगों को ये बताया होगा कि परमेश्वर क्या करने वाला है फ़िर भी लोग अपने में मगन थे...
और जब समय नज़दिक आया तब परमेश्वर ने जो जल को निचे के जल के बीच अंतर से अलग किया था तब परमेश्वर ने वायुमण्डल मे वो सारे जल को इकठ्ठा कर पृथ्वी पर बरसा दिया
उत्पत्ति 7:11 में इस प्रकार पाते हैं
जब नूह की आयु के छः सौवें वर्ष के दूसरे महीने का सत्रहवाँ दिन आया; उसी दिन बड़े गहरे समुद्र के सब सोते फूट निकले और आकाश के झरोखे खुल गए।
जब नूह की आयु के छः सौवें वर्ष के दूसरे महीने का सत्रहवाँ दिन आया; उसी दिन बड़े गहरे समुद्र के सब सोते फूट निकले और आकाश के झरोखे खुल गए।
मैं ऐसा समझता हूँ कि निचे का जल और उपर का जल मिलकर जल-प्रलय के रूप मे आया....
मैं ऐसा मानता हूं कि नूह ने पहली बार बारिश को देखा होगा तब मनुष्य की दृष्टि मे ये बारिश दिखाई दी होगी,
जब उत्पत्ति 8:2 से पढ़ते है तो पाते हैं कि परमेश्वर ने पवन चलाई, जल घटाने के लिय जो जल भाप बनकर वायुमंडल में मिल गया, जिसको हम विग्यान की भाषा में जलवाष्प या जलचक्र भी कहते हैं,
यहाँ एक बात तो साफ़ है कि परमेश्वर ने वापस उस उपर के जल को उसी जगह स्थिर कर किया और फ़िर यहाँ से वर्षा,हिम,जलवाष्प,भाप,बादल इन सबकी क्रिया शुरू हुआ, जो हम अब तक देख सकते हैं...
मैं आपको बता देना चाहता हूँ कि जैसे नूह के दिनो में लोग खाते-पिते इनमें शादीयाँ होती थी और लोग अपने में मगन थे की क्या होगा किसी को पता न था मत्ती (24:37-39 और लूका 17:27-29)
ठिक वैसे ही अब अंत के दिनो होने वाला है,
परमेश्वर ने जब चौथे दिन कई ज्योतियाँ बनाई और दो बड़ी ज्योति(सुर्य और चाँद) को भी बनाया इन सबको सिर्फ़ इसलिए नहीं बनाया कि वे अंधियारे को उजियाले और उजियाले को अंधियारे से अलग करे, बल्कि चिन्हो, नियत समय दिनों और वर्षो के लिए भी बनाया था
आज समय दिन और वर्षो को उसी से आका जाता है....
चौथे दिन जो कुछ बनाया परमेश्वर ने वो सब आज के समय में पुरा होगा जैसा कि (मत्ती 24:29, मरकुस 13:24, लूका 21:25)
परमेश्वर द्वारा जो भी बना वो खास उद्देश्य के लिये ही बना है(नितिवचन 16:4)
अब परमेश्वर को और परमेश्वर द्वारा बनाईं गई सृष्टि और उसके ठहराये हुए वस्तुओ को आप कितना समझ सकते हैं और परमेश्वर के बारे में कितना जान सकते हैं ये आपके और परमेश्वर के बीच की बातें है...
प्रभु आपको आशीष दें...

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