सही और गलत का चुनाव
जय मसीह की
मेरे प्रिय भाई-बहन आज एक और नया विषय आपके सामने रख रहा हूँ... जो परमेश्वर के द्वारा एक नयी बात पता चली...प्रभु की कितना महान है, जब तो बात करता है तो सच में सुनने वाले भी उसके वचन से आनंदित और आशीषित जरूर होते हैं,
मैं बहुत उत्साहित और विश्वास के साथ आपसे बात करने जा रहा हूँ...आप ध्यान से पढ़े क्योंकि परमेश्वर का आत्मा आपसे बात करने जा रहा है...
मैं आपको साफ़ शब्दों में बताना चाहता हूं कि परमेश्वर और परमेश्वर का काम सही है, परमेश्वर अपना काम सही तरीके से करता है और वो चाहता है कि उसके लोग भी सही चाल और सही रिति से चले क्योंकि परमेश्वर सही है तो परमेश्वर के लोग भी सही बने...
आपने बाइबल में यशायाह भविष्यवक्ता के बारे मे पढा होगा, जो कि प्रभु यीशु के जन्म से 700 साल पहले ये भविष्यवाणी की थी कि यीशु का जन्म किस प्रकार से होगा....
मैं आपको इसी पुस्तक में से एक व्यक्ति के बारे में बताने वाला हूं आप मेरी बात पर गौर करे...
हम इस बात को जानते हैं कि शैतान जब स्वर्ग में परमेश्वर की अराधना करता था तो वो एक स्वर्ग्दुत था, और परमेश्वर ने उसे बहुत सुंदर भी बनाया था...जब तक वो शैतान नहीं बना तब तक वो एक खुबसुरत स्वर्ग्दुत हुआ करता था, कहते हैं जब वो चलता था वो उसके पंख के धुन(music) निकलता था, और बाकी स्वर्ग्दुत उसके खुबसुरती की प्रशंसा भी करते थे...लेकिन यही प्रशंसा ने उसे शैतान बना डाला, क्योंकि उसके मन में घमंड इस बात को लेकर आया कि सब बातों में उत्तम हूं मैं भी परमेश्वर के तुल्य बनून्गा...
लूसिफ़र/शैतान अपना सिहान्सन परमेश्वर से भी उँचा करना चाहता था,
🔜“हे भोर के चमकनेवाले तारे, तू कैसे आकाश से गिर पड़ा है? तू जो जाति जाति को हरा देता था, तू अब कैसे काटकर भूमि पर गिराया गया है? तू मन में कहता तो था, ‘मैं स्वर्ग पर चढ़ूँगा; मैं अपने सिंहासन को ईश्वर के तारागण से अधिक ऊँचा करूँगा; और उत्तर दिशा की छोर पर सभा के पर्वत पर विराजूँगा, मैं मेघों से भी ऊँचे ऊँचे स्थानों के ऊपर चढ़ूँगा, मैं परमप्रधान के तुल्य हो जाऊँगा।’ परन्तु तू अधोलोक में उस गड़हे की तह तक उतारा जाएगा।
यशायाह 14:12-15
हम ये देखते हैं कि शैतान जब जब परमेश्वर से उँचा उठना चाहा वो और निचे गिरता चला गया...
परमेश्वर ने उसे स्वर्ग से निकाल दिया और उसके साथ साथ उन स्वर्ग्दुतो को भी जिसे शैतान ने अपनी ओर कर के भरमा लिया था...जो आज के समय में दुष्टात्मा कहलाते है....
शैतान जब उँचा बनना चाहा वो और निचे गिरता चला गया क्योंकि उसके इरादे गलत थे....वो सही था....
इसलिए जब भी हम अपने डायरी या बोर्ड या किसी भी जगह ❌(गलत) निशान बनाते है तो ये उपर से निचे की ही ओर बनता है न की निचे से उपर की ओर आप खुद चेक कर सकते हैं....
और परमेश्वर का हर एक चीज सही होता है...
बाइबल में हमें ऐसी बहुत सी बातें पाई जाती है जो हमारे हित के लिए सही होती है....परमेश्वर का वचन प्रभावशाली है...परमेश्वर का वचन काम करता है, क्योंकि परमेश्वर हमें सही करना चाह्ता है....
जब हम बाइबल के चार सुसमाचार की पुस्तक मत्ती, मरकुस, लूक, यूहन्ना में हम पाते हैं कि प्रभु यीशु मसीह जो कि खुद एक परमेश्वर है स्वर्ग से निचे इस धरती में आया, सत्य और धार्मिकता के बारे में बताने खुद का बलिदान हमारे लिये देने और फ़िर अपने जीवते होने का प्रमाण देते हुए वापस स्वर्ग को उठा लिये जाने तक तो ये निशान✔ इस प्रकार यीशु के जीवन को दिखाता है कि स्वर्ग से धरती पर आया और फ़िर वापस स्वर्ग को गया....क्योंकि परमेश्वर ने जो किया वो हमारे लिये सही था...
जब प्रभु यीशु मसीह की शिक्षा पहाड़ी उप्देश हो या अन्य शिक्षा हो...तो परमेश्वर हमें यही सिखाता है कि हम जहाँ है वहाँ से नम्र, दीन, दयालु, प्रेम करने वाले बने, जैसे येशु ने किया, क्योंकि यीशु का यही दिनता और नम्रता का जीवन उसके गौशाले में जन्म लेने से ही शुरू हो चुका था, कि उसे कैसे जीवन जीना है और परमेश्वर की धार्मिक को कैसे पुरा करना है....
उसी प्रकार आज परमेश्वर हमें भी✔करना चाहता है....पहले वो हमें तमाम तरह की परिस्थितियों से गुजरते हुए, परीक्षाओ को पार करते हुए...अंदर से तोड़ते हुए इतना निचे तक ले जायेगा, जब हम प्रभु में आते हैं तो परमेश्वर पर हमारा कितना विश्वास है ये परख हमारी बुरी परिस्थिति में होती है कि हमारा विश्वास में कैसा है हम विश्वास में कितने पक्के है...इसलिये परमेश्वर हमें उस मिट्टी के समान बनाता है जैसे एक कुम्हार किसी पात्र को बनाते समय उस मिट्टी को गुथता है, सानता है, उसे आकार देता है और फ़िर आज में झौक देता है..जब सारी परिस्थिति ने निकलकर बाहर आता है तो वो आदर का पात्र बन जाता है..जो कि उन्हें स्थान में रखा भी जाता है और उसका आदर सम्मान भी होता है.....उसी प्रकार परमेश्वर भी निचे से ऊपर की ओर ले जाता है ताकी हम भी सही बने...✔
मेरे प्रियो अगर परमेश्वर ने मुझ से पहले किसी से बात की हो तो मैं नहीं जानता पर आज मेरे चर्च में परमेश्वर द्वारा ये प्रकाशन मिला...तो जब तक मैं आपके भी इन बातों को नहीं रख देता तब तक मेरा आत्मा व्याकुल ही रहता....
अब चुनाव आपका है कि आप क्या चुनाव करते है....✔या ❌
प्रभु आपको आशीष
दें....
मेरे प्रिय भाई-बहन आज एक और नया विषय आपके सामने रख रहा हूँ... जो परमेश्वर के द्वारा एक नयी बात पता चली...प्रभु की कितना महान है, जब तो बात करता है तो सच में सुनने वाले भी उसके वचन से आनंदित और आशीषित जरूर होते हैं,
मैं बहुत उत्साहित और विश्वास के साथ आपसे बात करने जा रहा हूँ...आप ध्यान से पढ़े क्योंकि परमेश्वर का आत्मा आपसे बात करने जा रहा है...
मैं आपको साफ़ शब्दों में बताना चाहता हूं कि परमेश्वर और परमेश्वर का काम सही है, परमेश्वर अपना काम सही तरीके से करता है और वो चाहता है कि उसके लोग भी सही चाल और सही रिति से चले क्योंकि परमेश्वर सही है तो परमेश्वर के लोग भी सही बने...
आपने बाइबल में यशायाह भविष्यवक्ता के बारे मे पढा होगा, जो कि प्रभु यीशु के जन्म से 700 साल पहले ये भविष्यवाणी की थी कि यीशु का जन्म किस प्रकार से होगा....
मैं आपको इसी पुस्तक में से एक व्यक्ति के बारे में बताने वाला हूं आप मेरी बात पर गौर करे...
हम इस बात को जानते हैं कि शैतान जब स्वर्ग में परमेश्वर की अराधना करता था तो वो एक स्वर्ग्दुत था, और परमेश्वर ने उसे बहुत सुंदर भी बनाया था...जब तक वो शैतान नहीं बना तब तक वो एक खुबसुरत स्वर्ग्दुत हुआ करता था, कहते हैं जब वो चलता था वो उसके पंख के धुन(music) निकलता था, और बाकी स्वर्ग्दुत उसके खुबसुरती की प्रशंसा भी करते थे...लेकिन यही प्रशंसा ने उसे शैतान बना डाला, क्योंकि उसके मन में घमंड इस बात को लेकर आया कि सब बातों में उत्तम हूं मैं भी परमेश्वर के तुल्य बनून्गा...
लूसिफ़र/शैतान अपना सिहान्सन परमेश्वर से भी उँचा करना चाहता था,
🔜“हे भोर के चमकनेवाले तारे, तू कैसे आकाश से गिर पड़ा है? तू जो जाति जाति को हरा देता था, तू अब कैसे काटकर भूमि पर गिराया गया है? तू मन में कहता तो था, ‘मैं स्वर्ग पर चढ़ूँगा; मैं अपने सिंहासन को ईश्वर के तारागण से अधिक ऊँचा करूँगा; और उत्तर दिशा की छोर पर सभा के पर्वत पर विराजूँगा, मैं मेघों से भी ऊँचे ऊँचे स्थानों के ऊपर चढ़ूँगा, मैं परमप्रधान के तुल्य हो जाऊँगा।’ परन्तु तू अधोलोक में उस गड़हे की तह तक उतारा जाएगा।
यशायाह 14:12-15
हम ये देखते हैं कि शैतान जब जब परमेश्वर से उँचा उठना चाहा वो और निचे गिरता चला गया...
परमेश्वर ने उसे स्वर्ग से निकाल दिया और उसके साथ साथ उन स्वर्ग्दुतो को भी जिसे शैतान ने अपनी ओर कर के भरमा लिया था...जो आज के समय में दुष्टात्मा कहलाते है....
शैतान जब उँचा बनना चाहा वो और निचे गिरता चला गया क्योंकि उसके इरादे गलत थे....वो सही था....
इसलिए जब भी हम अपने डायरी या बोर्ड या किसी भी जगह ❌(गलत) निशान बनाते है तो ये उपर से निचे की ही ओर बनता है न की निचे से उपर की ओर आप खुद चेक कर सकते हैं....
और परमेश्वर का हर एक चीज सही होता है...
बाइबल में हमें ऐसी बहुत सी बातें पाई जाती है जो हमारे हित के लिए सही होती है....परमेश्वर का वचन प्रभावशाली है...परमेश्वर का वचन काम करता है, क्योंकि परमेश्वर हमें सही करना चाह्ता है....
जब हम बाइबल के चार सुसमाचार की पुस्तक मत्ती, मरकुस, लूक, यूहन्ना में हम पाते हैं कि प्रभु यीशु मसीह जो कि खुद एक परमेश्वर है स्वर्ग से निचे इस धरती में आया, सत्य और धार्मिकता के बारे में बताने खुद का बलिदान हमारे लिये देने और फ़िर अपने जीवते होने का प्रमाण देते हुए वापस स्वर्ग को उठा लिये जाने तक तो ये निशान✔ इस प्रकार यीशु के जीवन को दिखाता है कि स्वर्ग से धरती पर आया और फ़िर वापस स्वर्ग को गया....क्योंकि परमेश्वर ने जो किया वो हमारे लिये सही था...
जब प्रभु यीशु मसीह की शिक्षा पहाड़ी उप्देश हो या अन्य शिक्षा हो...तो परमेश्वर हमें यही सिखाता है कि हम जहाँ है वहाँ से नम्र, दीन, दयालु, प्रेम करने वाले बने, जैसे येशु ने किया, क्योंकि यीशु का यही दिनता और नम्रता का जीवन उसके गौशाले में जन्म लेने से ही शुरू हो चुका था, कि उसे कैसे जीवन जीना है और परमेश्वर की धार्मिक को कैसे पुरा करना है....
उसी प्रकार आज परमेश्वर हमें भी✔करना चाहता है....पहले वो हमें तमाम तरह की परिस्थितियों से गुजरते हुए, परीक्षाओ को पार करते हुए...अंदर से तोड़ते हुए इतना निचे तक ले जायेगा, जब हम प्रभु में आते हैं तो परमेश्वर पर हमारा कितना विश्वास है ये परख हमारी बुरी परिस्थिति में होती है कि हमारा विश्वास में कैसा है हम विश्वास में कितने पक्के है...इसलिये परमेश्वर हमें उस मिट्टी के समान बनाता है जैसे एक कुम्हार किसी पात्र को बनाते समय उस मिट्टी को गुथता है, सानता है, उसे आकार देता है और फ़िर आज में झौक देता है..जब सारी परिस्थिति ने निकलकर बाहर आता है तो वो आदर का पात्र बन जाता है..जो कि उन्हें स्थान में रखा भी जाता है और उसका आदर सम्मान भी होता है.....उसी प्रकार परमेश्वर भी निचे से ऊपर की ओर ले जाता है ताकी हम भी सही बने...✔
मेरे प्रियो अगर परमेश्वर ने मुझ से पहले किसी से बात की हो तो मैं नहीं जानता पर आज मेरे चर्च में परमेश्वर द्वारा ये प्रकाशन मिला...तो जब तक मैं आपके भी इन बातों को नहीं रख देता तब तक मेरा आत्मा व्याकुल ही रहता....
अब चुनाव आपका है कि आप क्या चुनाव करते है....✔या ❌
प्रभु आपको आशीष
दें....
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें