मनुष्य परमेश्वर को प्रकट नहीं कर सकता, परमेश्वर खुद प्रकट होता आया
मेरे प्रिय भाई-बहन एक बात आप से कहना चाहता हूँ कि बिते दिनो मेरे एक पोस्ट में काफ़ी बहस हुई थी, जिसमें अन्य आस्था से जुड़े किसी ने ये सवाल कर दिया था कि परमेश्वर को प्रकट करो वो है तो उनका कहना था कि यीशु मर चुका है वो परमेश्वर नहीं है, परमेश्वर का कोई रूप नहीं है वो प्रकाश है, सर्वशक्तिमान मान है, ग्यानी है, उसे कोई नहीं देख सकता है, उनका सवाल था अगर वो है तो दिखाओ....
वैसे तो मैं जवाब दे सकता था पर नहीं दिया मैने इसलिये कि जब एक बात कर रहा हो तो उसके बीच में बिना उसके इज़ाज़त के आना अच्छी बात नहीं होती वरना दोनों की अलग अलग बातों को समझाने का तरिका अलग अलग होता है...तो मैं चुप रहा..
मैं अक्सर उनके सवालो से जानता हूँ कि जिस परमेश्वर की अराधना हम करते हैं उसका कोई अस्थित्व नहीं है...
क्योंकि मैं वचन से प्रमाणित तो कर सकता था, लेकिन हर बार वचन का सहारा लेना ऐसे लोगों के लिए सही नहीं वरना आपके वचन को तो व्यर्थ समझेगा ही साथ ही साथ आपके द्वारा परमेश्वर के का अपमान भी होगा, वैसे लोगों ने तो परमेश्वर का अपमान तो किया ही है पर मैं ऐसा मानता हूं कि परमेश्वर के वचन जिसे हम जीवन मानते है वो जीवन जो इस संसार का नहीं..उस वचन को किसी और के पैरो तले रौंदना क्या सही है??
पवित्र आत्मा की अगुवाई में हर काम को करे बिना सोचे समझे हर सवालो के जवाब न दिया करे...एक तो पहले आपके पास पवित्र आत्मा का प्रकाशन का होना जरूरी है और दुसरी बात की पवित्र आत्मा की अगुवाई में चलना भी जरूरी है...
जिस भाई का सवाल था कि परमेश्वर को प्रकट करो, तो भाई मैं परमेश्वर को प्रकट नहीं कर सकता हूँ मैं परमेश्वर के गुण को अपने जीवन से दिखा सकता हूं, परमेश्वर अपने आप जिसके सामने चाहे प्रकट हो जायेगा अगर वो विश्वास करे तो..
जिन जिन लोगों ने परमेश्वर पर विश्वास किया परमेश्वर अपने कामों के द्वारा प्रकट किया है अपने आप को
मैने एक कलम की तस्वीर आपके सामने रखी है, अगर मैं कहूं कि ये पेन्सिल है तो क्या आप विश्वास करोगे? आप विश्वास नहीं करोगे वो इस्लिये की आप उसे देख रखे हो तब आप विश्वास कर रहे हो कि वो एक कलम ही है...
और मैं उस कलम को किसी प्रकार से छिपा दू अपने हाथों में और मैं कहूं कि मेरे हाथ में कलम है तो क्या आप विश्वास करोगे? आप विश्वास नहीं करोगे क्योंकि आप उसे देख नहीं पा रहे हो...
लेकिन परमेश्वर का वचन जिसे हम बाइबल के रूप में जानते हैं वो हमें बताती है कि हमे जो दिखाई देती है उन बातों पर विश्वास नहीं करना है क्योंकि जो दिखाई देती है वो एक न एक दिन नष्ट हो जानी है, वचन इस बात को बताता है कि हमें अन्देखी वस्तुओ बातों पर विश्वास करना चाहिए...
इब्रानी 11 अध्याय मे पाते हैं
वचन इस बात को कहता है कि विश्वास सुनने से सुनना परमेश्वर के वचन से होता है....
इब्रानी 11:6 इस बात को बताता है कि विश्वास बिना परमेश्वर को प्रसन्न नहीं किया जा सकता है..
विश्वास करने वाले को चाहिए कि वो है और अपने खोजने वाले को प्रतिफ़ल देता है
उदाहरण स्वरूप:-
जैसा कि मैने एक कलम की बात की थोड़े देर के लिए विश्वास कर लिया जाये कि कलम परमेश्वर है और वो छिपा हुआ है जिसे हम नहीं देख सकते हैं अगर वो सच में कलम/परमेश्वर है तो वो कलम/परमेश्वर अपने आप को कैसे प्रमाणित करेगा🤔🤔 हाँ वो है, वो कलम जिसे विश्वास के द्वारा हम मानते हैं कि वो परमेश्वर है जिसे हमने नहीं देखा तो वो कलम अपने आप को प्रमाणित करने के लिए लिख कर दिखा देगा कि मैं ही हूं मेरे समान कोई और नहीं है....
यही बात परमेश्वर अपने आप को प्राचीनकाल से प्रकट करते आया है अपने कामों के द्वारा....कभी आग और बादल बनकर लोगों के संग-संग तो कभी मनुष्य पुत्र बनकर और अब परमेश्वर का आत्मा पवित्र आत्मा जिसे संसार ग्रहण नहीं कर सकता है वो न तो उसे देखता है और न ही उसे जानता है क्योंकि वो पवित्रआत्मा जो परमेश्वर का आत्मा अर्थात परमेश्वर है वो हमारे साथ हमारा सहायक के रूप में है....
सत्य अपने आप को साबित करने की जरूरत नहीं, सत्य उसी पर प्रकट होगा जिस पर वो प्रकट होना चाह्ता है, हम परमेश्वर को प्रकट नहीं कर सकते हैं, हम परमेश्वर के गवाह बन सकते हैं.....क्योंकि जब हम गवाह है तो उसे अपने आप को प्रकट करने की जरूरत नहीं......
parmeshwarpremhai123.blogspot.com
वैसे तो मैं जवाब दे सकता था पर नहीं दिया मैने इसलिये कि जब एक बात कर रहा हो तो उसके बीच में बिना उसके इज़ाज़त के आना अच्छी बात नहीं होती वरना दोनों की अलग अलग बातों को समझाने का तरिका अलग अलग होता है...तो मैं चुप रहा..
मैं अक्सर उनके सवालो से जानता हूँ कि जिस परमेश्वर की अराधना हम करते हैं उसका कोई अस्थित्व नहीं है...
क्योंकि मैं वचन से प्रमाणित तो कर सकता था, लेकिन हर बार वचन का सहारा लेना ऐसे लोगों के लिए सही नहीं वरना आपके वचन को तो व्यर्थ समझेगा ही साथ ही साथ आपके द्वारा परमेश्वर के का अपमान भी होगा, वैसे लोगों ने तो परमेश्वर का अपमान तो किया ही है पर मैं ऐसा मानता हूं कि परमेश्वर के वचन जिसे हम जीवन मानते है वो जीवन जो इस संसार का नहीं..उस वचन को किसी और के पैरो तले रौंदना क्या सही है??
पवित्र आत्मा की अगुवाई में हर काम को करे बिना सोचे समझे हर सवालो के जवाब न दिया करे...एक तो पहले आपके पास पवित्र आत्मा का प्रकाशन का होना जरूरी है और दुसरी बात की पवित्र आत्मा की अगुवाई में चलना भी जरूरी है...
जिस भाई का सवाल था कि परमेश्वर को प्रकट करो, तो भाई मैं परमेश्वर को प्रकट नहीं कर सकता हूँ मैं परमेश्वर के गुण को अपने जीवन से दिखा सकता हूं, परमेश्वर अपने आप जिसके सामने चाहे प्रकट हो जायेगा अगर वो विश्वास करे तो..
जिन जिन लोगों ने परमेश्वर पर विश्वास किया परमेश्वर अपने कामों के द्वारा प्रकट किया है अपने आप को
मैने एक कलम की तस्वीर आपके सामने रखी है, अगर मैं कहूं कि ये पेन्सिल है तो क्या आप विश्वास करोगे? आप विश्वास नहीं करोगे वो इस्लिये की आप उसे देख रखे हो तब आप विश्वास कर रहे हो कि वो एक कलम ही है...
और मैं उस कलम को किसी प्रकार से छिपा दू अपने हाथों में और मैं कहूं कि मेरे हाथ में कलम है तो क्या आप विश्वास करोगे? आप विश्वास नहीं करोगे क्योंकि आप उसे देख नहीं पा रहे हो...
लेकिन परमेश्वर का वचन जिसे हम बाइबल के रूप में जानते हैं वो हमें बताती है कि हमे जो दिखाई देती है उन बातों पर विश्वास नहीं करना है क्योंकि जो दिखाई देती है वो एक न एक दिन नष्ट हो जानी है, वचन इस बात को बताता है कि हमें अन्देखी वस्तुओ बातों पर विश्वास करना चाहिए...
इब्रानी 11 अध्याय मे पाते हैं
वचन इस बात को कहता है कि विश्वास सुनने से सुनना परमेश्वर के वचन से होता है....
इब्रानी 11:6 इस बात को बताता है कि विश्वास बिना परमेश्वर को प्रसन्न नहीं किया जा सकता है..
विश्वास करने वाले को चाहिए कि वो है और अपने खोजने वाले को प्रतिफ़ल देता है
उदाहरण स्वरूप:-
जैसा कि मैने एक कलम की बात की थोड़े देर के लिए विश्वास कर लिया जाये कि कलम परमेश्वर है और वो छिपा हुआ है जिसे हम नहीं देख सकते हैं अगर वो सच में कलम/परमेश्वर है तो वो कलम/परमेश्वर अपने आप को कैसे प्रमाणित करेगा🤔🤔 हाँ वो है, वो कलम जिसे विश्वास के द्वारा हम मानते हैं कि वो परमेश्वर है जिसे हमने नहीं देखा तो वो कलम अपने आप को प्रमाणित करने के लिए लिख कर दिखा देगा कि मैं ही हूं मेरे समान कोई और नहीं है....
यही बात परमेश्वर अपने आप को प्राचीनकाल से प्रकट करते आया है अपने कामों के द्वारा....कभी आग और बादल बनकर लोगों के संग-संग तो कभी मनुष्य पुत्र बनकर और अब परमेश्वर का आत्मा पवित्र आत्मा जिसे संसार ग्रहण नहीं कर सकता है वो न तो उसे देखता है और न ही उसे जानता है क्योंकि वो पवित्रआत्मा जो परमेश्वर का आत्मा अर्थात परमेश्वर है वो हमारे साथ हमारा सहायक के रूप में है....
सत्य अपने आप को साबित करने की जरूरत नहीं, सत्य उसी पर प्रकट होगा जिस पर वो प्रकट होना चाह्ता है, हम परमेश्वर को प्रकट नहीं कर सकते हैं, हम परमेश्वर के गवाह बन सकते हैं.....क्योंकि जब हम गवाह है तो उसे अपने आप को प्रकट करने की जरूरत नहीं......
parmeshwarpremhai123.blogspot.com

Bhai me aapse pita Parmeshwar ke bare main bat karna cahta hu my ph 9988399683
जवाब देंहटाएंboliye kya baat hai karni hai
हटाएंYes... Parmeshwar hi prem hai
जवाब देंहटाएंGod bless you.
GOD BLESS YOU SISTER
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