मैं अपने पिता से दूर तो नहीं
🙏सभी लोगों को प्रभु यीशु मसीह के नाम में जय मसीह की🙏
एक बेटा अपने पिता की तारिफ़ अपने दोस्तों के बीच, रिश्तेदारो के बीच अपने मुहल्ले में और भी बहुत से जगह में करता है,
वो कहता है अपने पिता के प्रेम के बारे में कि उसका पिता उससे कितना प्रेम करता है, वो बेटा अपने पिता की हर एक वो बात जो उसका पिता उसके लिये करता है बताता रहता है, वो बेटा सारे लोगों के बीच ये कहता है कि उसका पिता उसकी हर जरूरतो को पूरा करता है, उसे जो चाहिए उसका पिता उसे लाकर देता है, वो बेटा अपने पिता कि हर एक अच्छाई को लोगों को बताया करता है, उसे अच्छा लगता अपने पिता के बारे में लोगों को बताने में,
हर दिन कुछ न कुछ उस बेटे के पास होता ही है अपने पिता के बारे में लोगों को बताने के लिए और वो लोगों के पास जाया करता है,
मैं आपसे सवाल करना चाहता हूं कि वो बेटा जो अपने पिता की तारिफ़ किये थकता नहीं है क्या वो एक अच्छा बेटा हो सकता है???🤔🤔
हाँ वो एक अच्छा बेटा हो सकता है✅
जरा सोचे कि वो ही बेटा जो हर दिन अपने पिता की तारिफ़ लोगों के पास जाकर करता है वो बेटा हर दिन अपने पिता के साथ समय नही बिताता है, अपने पिता के करीब एक पल भी रहता है, उसका पिता ये इंतज़ार में रहता है कि आज तो मेरा मेरे साथ समय बितायेगा, भले ली कुछ देर के लिए ही सही पर ऐसा होता नहीं है, बेटा को इस बात का एहसास तक नहीं है कि वो पिता के करीब नहीं वो लोगों के करीब हैं,
वो पिता से बहुत दूर है और पिता को दुख होता है पर ये बात किसी से न कहता है न ही इस बात का पता अपने बेटे को होने देता है, तो आप ही बताइये कि क्या वो बेटा अब सही है🤔🤔
नहीं वो सही बेटा नहीं है
ठिक इसी बेटे के समान हम सब भी हो सकते हैं
जैसे वो बेटा अपने पिता कि तारिफ़ सबके सामने करता है उसी प्रकार हम सब भी परमेश्वर पिता की महानता, उसका प्रेम, अनुग्रह, दया, कृपा, सामर्थ्य हर एक अद्भुत कामों का बखान भले ही पूरे संसार में सुसामाचार के माध्यम से कर रहे हो,
पर हमारा हर दिन का व्यतिगत रिश्ता परमेश्वर के साथ नही है, हम परमेश्वर के साथ नही रहते, हम अपने स्वर्गीय पिता के पास आते नहीं, उसके साथ समय नही बिताते, उसकी बात नहीं सुनते
तो क्या हम परमेश्वर के सही बेटे या बेटियाँ बन सकते है🤔🤔🤔
क्या परमेश्वर हमारी इस आदतों से खुश होता होगा🤔🤔
क्या हम उस बेटे के समान नहीं कर रहे हैं...क्या हमें इस बात का पता है कि हम अपने परमेश्वर से कितने दूर है,
हमें हर दिन अपने आपको पिता की दृष्टि से देखने की जरूरत है कि क्या हम पिता के करीब है या पिता से दूर है,....
हमें हर दिन अपने आपको जाँचना चाहिए, अपने आपको परखना चाहिए कि हम विश्वास में है कि नही...
मैं इस बात को आपके सामने इसलिए लिख रहा हूँ कि मुझे ये एहसास हुआ है एक मसीही गीत के माध्यम से कि
👉मैं पिता से दूर तो नहीं🤔
एक बेटा अपने पिता की तारिफ़ अपने दोस्तों के बीच, रिश्तेदारो के बीच अपने मुहल्ले में और भी बहुत से जगह में करता है,
वो कहता है अपने पिता के प्रेम के बारे में कि उसका पिता उससे कितना प्रेम करता है, वो बेटा अपने पिता की हर एक वो बात जो उसका पिता उसके लिये करता है बताता रहता है, वो बेटा सारे लोगों के बीच ये कहता है कि उसका पिता उसकी हर जरूरतो को पूरा करता है, उसे जो चाहिए उसका पिता उसे लाकर देता है, वो बेटा अपने पिता कि हर एक अच्छाई को लोगों को बताया करता है, उसे अच्छा लगता अपने पिता के बारे में लोगों को बताने में,
हर दिन कुछ न कुछ उस बेटे के पास होता ही है अपने पिता के बारे में लोगों को बताने के लिए और वो लोगों के पास जाया करता है,
मैं आपसे सवाल करना चाहता हूं कि वो बेटा जो अपने पिता की तारिफ़ किये थकता नहीं है क्या वो एक अच्छा बेटा हो सकता है???🤔🤔
हाँ वो एक अच्छा बेटा हो सकता है✅
जरा सोचे कि वो ही बेटा जो हर दिन अपने पिता की तारिफ़ लोगों के पास जाकर करता है वो बेटा हर दिन अपने पिता के साथ समय नही बिताता है, अपने पिता के करीब एक पल भी रहता है, उसका पिता ये इंतज़ार में रहता है कि आज तो मेरा मेरे साथ समय बितायेगा, भले ली कुछ देर के लिए ही सही पर ऐसा होता नहीं है, बेटा को इस बात का एहसास तक नहीं है कि वो पिता के करीब नहीं वो लोगों के करीब हैं,
वो पिता से बहुत दूर है और पिता को दुख होता है पर ये बात किसी से न कहता है न ही इस बात का पता अपने बेटे को होने देता है, तो आप ही बताइये कि क्या वो बेटा अब सही है🤔🤔
नहीं वो सही बेटा नहीं है
ठिक इसी बेटे के समान हम सब भी हो सकते हैं
जैसे वो बेटा अपने पिता कि तारिफ़ सबके सामने करता है उसी प्रकार हम सब भी परमेश्वर पिता की महानता, उसका प्रेम, अनुग्रह, दया, कृपा, सामर्थ्य हर एक अद्भुत कामों का बखान भले ही पूरे संसार में सुसामाचार के माध्यम से कर रहे हो,
पर हमारा हर दिन का व्यतिगत रिश्ता परमेश्वर के साथ नही है, हम परमेश्वर के साथ नही रहते, हम अपने स्वर्गीय पिता के पास आते नहीं, उसके साथ समय नही बिताते, उसकी बात नहीं सुनते
तो क्या हम परमेश्वर के सही बेटे या बेटियाँ बन सकते है🤔🤔🤔
क्या परमेश्वर हमारी इस आदतों से खुश होता होगा🤔🤔
क्या हम उस बेटे के समान नहीं कर रहे हैं...क्या हमें इस बात का पता है कि हम अपने परमेश्वर से कितने दूर है,
हमें हर दिन अपने आपको पिता की दृष्टि से देखने की जरूरत है कि क्या हम पिता के करीब है या पिता से दूर है,....
हमें हर दिन अपने आपको जाँचना चाहिए, अपने आपको परखना चाहिए कि हम विश्वास में है कि नही...
मैं इस बात को आपके सामने इसलिए लिख रहा हूँ कि मुझे ये एहसास हुआ है एक मसीही गीत के माध्यम से कि
👉मैं पिता से दूर तो नहीं🤔

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