दशवान्श और दान
🙏जय मसीह की🙏
मेरे प्रिय भाई-बहन
आज का विषय दशवान्श और दान के बारे में है
मेरे प्रियो बहुत से ऐसे लोग हैं जो इस विषय पर बात करना नहीं चाहते हैं, वे हिचकिचाते है इस विषय पर बात करने से
क्योंकि उन्हें अपने धन 💰 से देना न पड़ जाये
पर मै आपको ये बताना चाहता हूं कि ना तो किसी चर्च और न किसी और की बातें मैं आपको बताना चाहता हूँ पर जो मैं कहना चाहता हूँ वो बाइबल से ही कहना चाहून्गा...
1➡मसीही होने के नाते हम यह समझते है कि सबकुछ परमेश्वर का है जिसमें हमारा पैसा और सम्पति भी शामिल है
2➡कलिसिया को चलाने के लिए और सुसमाचार फ़ैलाने के लिये पैसे की आवश्यकता होती है! कलिसिया को चलाने और सुसमाचार फ़ैलाने के लिए कीमत का भुगतान कौन करेगा? मसीह के अनुयायी!
3➡दशवान्श देना सिर्फ परमेश्वर की दी हूई जिम्मेदारी नहीं परंतु परमेश्वर के लोगों के लिए आशीशो का एक उपाय भी है
l. दशवान्श के सिद्धात
दशवान्श के सिद्धांत परमेश्वर के वचन पर अधारित है कि परमेश्वर सब चिजो का मालिक है, वह हमारे धन और सम्पति का भी अधिकारी है
A. परमेश्वर सब कुछ का मालिक हैं
पृथ्वी और जो कुछ उस में है यहोवा ही का है, जगत और उस में निवास करनेवाले भी।
भजन संहिता 24:1
क्योंकि वन के सारे जीव-जन्तु और हज़ारों पहाड़ों के जानवर मेरे ही हैं। पहाड़ों के सब पक्षियों को मैं जानता हूँ, और मैदान पर चलने फिरनेवाले जानवर मेरे ही हैं। “यदि मैं भूखा होता तो तुझ से न कहता; क्योंकि जगत् और जो कुछ उस में है वह मेरा है।
भजन संहिता 50:10-12
चाँदी तो मेरी है, और सोना भी मेरा ही है, सेनाओं के यहोवा की यही वाणी है।
हाग्गै 2:8
B. मसीही केवल परमेश्वर की सम्तति का प्रबंधक है और परमेश्वर हर एक चीज़ का मालिक है, परमेश्वर हमसे उम्मीद करता है कि उसके प्रबंधक के रूप में उसके प्रति विश्वासयोग्य बने
C. हर मसीही को परमेश्वर के प्रबंधक के रूप में विश्वासयोग्य होना चाहिए
फिर यहाँ भण्डारी में यह बात देखी जाती है कि वह विश्वासयोग्य हो।
1 कुरिन्थियों 4:2
(ii) दशवान्श देने वाले के लिए परमेश्वर की प्रतिग्या
सारे दशमांश भण्डार में ले आओ कि मेरे भवन में भोजनवस्तु रहे; और सेनाओं का यहोवा यह कहता है, कि ऐसा करके मुझे परखो कि मैं आकाश के झरोखे तुम्हारे लिये खोलकर तुम्हारे ऊपर अपरम्पार आशीष की वर्षा करता हूँ कि नहीं।
मलाकी 3:10
A. जो लोग दशवान्श नहीं देते वो परमेश्वर को लूटते है
B. जो लोग दशवान्श नहीं देते वो श्रापित है
C. जो लोग दशवान्श देते हैं उन पर परमेश्वर द्वारा की आशीषो का वादा है, इनमें कुछ आशीषे स्वास्थ्य, बल, और आत्मिक जरूरते भी है.
(iii) दशवान्श कैसे दे?
A. हमें दशवान्श कितना देना चाहिए?
➡दशवान्श 10 रुपये का एक रुपया, 100 ररुपए का 10 होता है यानी कि 10 प्रतिशत होता है. जो भी हो जो हमने कमाया हो, उपहार में मिला, या बचत किया हो, या किसी चिज़ की किमत के अनुसार उसका 10 भाग
B. दशवान्श और भेट में अंतर क्या है?
➡दशवान्श एक निश्चित राशि है जो देने को कहा गया है और भेट अनिश्चित राशि है जो दशवान्श के बाद 90 प्रतिशत में से दी जाती है...भेट की राशि परमेश्वर के आशीषो के अनुसार दी जानी चाहिए...परमेश्वर ये नहीं देखता कि हमने क्या दिया है पर ये देखता है कि देने के बात हमने अपने पास क्या बचाया है...
वह मन्दिर के भण्डार के सामने बैठकर देख रहा था कि लोग मन्दिर के भण्डार में किस प्रकार पैसे डालते हैं; और बहुत से धनवानों ने बहुत कुछ डाला। इतने में एक कंगाल विधवा ने आकर दो दमड़ियाँ, जो एक अधेले के बराबर होती हैं, डालीं। तब उसने अपने चेलों को पास बुलाकर उन से कहा, “मैं तुम से सच कहता हूँ कि मन्दिर के भण्डार में डालने वालों में से इस कंगाल विधवा ने सबसे बढ़कर डाला है; क्योंकि सब ने अपने धन की बढ़ती में से डाला है, परन्तु इसने अपनी घटी में से जो कुछ उसका था, अर्थात् अपनी सारी जीविका डाल दी है।”
मरकुस 12:41-44
C. दशवान्श और भेट कहाँ लाये?
➡परमेश्वर ने कहा दशवान्श परमेश्वर के धर में लाना चाहिए, #मलाकी 3:10
पुराने नियम में दशमान्श परमेश्वर के मंदिर में लाया करते थे, पर आज मसीही लोग अपना दशवान्श अपनी कलिसिया में लाते है, जहाँ वो संगति करते हैं उनके यदि हम ये सोचते हैं कि उस दशवान्श को किसी की मदद कर सकते है तो हम उस दशवान्श से नहीं पर दशवान्श से बचे हुए राशि से कर सकते हैं है, दशवान्श कलिसिया में ही लाना चाहिए.
D. दशवान्श और भेट कब लाये?
➡सप्ताह के पहले दिन तुम में से हर एक अपनी आमदनी के अनुसार कुछ अपने पास रख छोड़ा करे कि मेरे आने पर चन्दा न करना पड़े।
1 कुरिन्थियों 16:2
हमारे लिये सप्ताह का पहला दिन रविवार होता है और रविवार के दिन मसीही लोग मिलते हैं अराधना करते हैं तो इसी दिन...दशवान्श और भेट भी अराधना का एक हिस्सा हैं
E. दशवान्श और भेट चढ़ाते समय हमारा आचरण कैसा हो?
➡परमेश्वर चाहता है कि हम खुशी से दशवान्श और भेट चढाये
हर एक जन जैसा मन में ठाने वैसा ही दान करे; न कुढ़ कुढ़ के और न दबाव से, क्योंकि परमेश्वर हर्ष से देनेवाले से प्रेम रखता है।
2 कुरिन्थियों 9
(iv). दशवान्श देने में समस्याएं
A. डर, की लोग पसंद नहीं करेंगे.
➡दशवान्श के विषय में बहुत सी कलिसिया में नहीं बताया जाता क्योंकि उन्हे डर है कि वो पसंद नहीं करेंगे, बहतर होगा कि हम बोले और परमेश्वर की आशीष लेने दें, चाहे वे इस बात से क्रोधित ही क्यों न हो, यदि हम दशवान्श के विषय में नहीं बतायेन्गे, या झूठ बोलेन्गे तो हम परमेश्वर की आशीषो को लोगों तक बहुचने से वन्चित कर रहे हैं, जो लोग वास्तव में परमेश्वर से प्रेम करते हैं वे इस बारे में सिखाये जाने के बाद क्रोधित नहीं होंगे...
B. विश्वास की मसीही व्यवस्था के अधीन नहीं है
➡कुछ लोग सोचते हैं कि उन्हे दशवान्श नहीं देना चाहिए, क्योंकि वे विश्वास करते हैं कि वह व्यवस्था के अधीन नहीं है लेकिन अब अनुग्रह का समय है
1. लेकिन दशवान्श व्यवस्था के दिये जाने के पहले भी दिया जाता था👇
👉जब वह कदोर्लाओमेर और उसके साथी राजाओं को जीतकर लौटा आता था तब सदोम का राजा शावे नामक तराई में, जो राजा की तराई भी कहलाती है, उससे भेंट करने के लिये आया। तब शालेम का राजा मलिकिसिदक, जो परमप्रधान ईश्वर का याजक था, रोटी और दाखमधु ले आया। और उसने अब्राम को यह आशीर्वाद दिया, “परमप्रधान ईश्वर की ओर से, जो आकाश और पृथ्वी का अधिकारी है, तू धन्य हो। और धन्य है परमप्रधान ईश्वर, जिसने तेरे द्रोहियों को तेरे वश में कर दिया है।” तब अब्राम ने उसको सब वस्तुओं का दशमांश दिया।
उत्पत्ति 14:17-20
और
👉और यह पत्थर, जिसका मैं ने खम्भा खड़ा किया है, परमेश्वर का भवन ठहरेगा : और जो कुछ तू मुझे दे उसका दशमांश मैं अवश्य ही तुझे दिया करूँगा।”
उत्पत्ति 28:22
2. व्यवस्था के समय परमेश्वर ने लोगों को दशवान्श देने को कहा( मलाकी 3:10)
प्रभु येशु ने भी दशवान्श के बारे में बताया( मत्ती 23:23)
3. मसीहो को दशवान्श के सिद्धांत पर जीने में खुशी होनी चाहिए, क्योंकि वे अनुग्रह के अधीन है..प्रभु यीशु जो जीवित है, आज मसीहो से दशवान्श इकठ्ठा करता है👇
👉लेवी की सन्तान में से जो याजक का पद पाते हैं, उन्हें आज्ञा मिली है कि लोगों, अर्थात् अपने भाइयों से, चाहे वे अब्राहम ही की देह से क्यों न जन्मे हों, व्यवस्था के अनुसार दसवाँ अंश लें। पर इसने, जो उनकी वंशावली में का भी न था, अब्राहम से दसवाँ अंश लिया, और जिसे प्रतिज्ञाएँ मिली थीं उसे आशीष दी। इसमें संदेह नहीं कि छोटा बड़े से आशीष पाता है। और यहाँ तो मरनहार मनुष्य दसवाँ अंश लेते हैं, पर वहाँ वही लेता है जिसकी गवाही दी जाती है कि वह जीवित है।
इब्रानियों 7:5-8
पद 8 मसीह के बारे में बताता है
C. धन से प्रेम
पैसा बहुत से विश्वासियो को दशवान्श देने से रोकता है. यह मसीह की देने की आत्मा के विरुद्ध में है, जिसने हमारे लिये सबकुछ दे दिया👇
👉तुम हमारे प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह जानते हो कि वह धनी होकर भी तुम्हारे लिये कंगाल बन गया, ताकि उसके कंगाल हो जाने से तुम धनी हो जाओ।
2 कुरिन्थियों 8:9
D. जब एक पत्नी मसीही है, और पति नहीं है
➡एक स्त्री को जो उसके पति के द्वारा उसके खर्च के लिये दिया जाता है तो उनमे से दशवान्श देना चाहिए,और नौकरी करती है तौभी देना चाहिए
E. दशवान्श से उधार लेना
➡दशवान्श से उधार लेना अच्छी बात नहीं है, लेकिन कुछ लोग ऐसा करते हैं, उनके लिए परमेश्वर ने कहा है कि उधार लिया है तो ब्याज सहित लौटाये
(लैव्यवस्था 27:30-31)
किसी ने कहा कि "पैसा मनुष्य के चरित्र को परखने का अच्छा माध्यम है, यह बताता है कि पैसा कमाने के लिए मनुष्य क्या करता है, और जब मिल जाता है तो वह उससे क्या करता है..
👉क्योंकि रुपये का लोभ सब प्रकार की बुराइयों की जड़ है, जिसे प्राप्त करने का प्रयत्न करते हुए बहुतों ने विश्वास से भटककर अपने आप को नाना प्रकार के दु:खों से छलनी बना लिया है।
1 तीमुथियुस 6:10
मेरे प्रिय भाई-बहन
आज का विषय दशवान्श और दान के बारे में है
मेरे प्रियो बहुत से ऐसे लोग हैं जो इस विषय पर बात करना नहीं चाहते हैं, वे हिचकिचाते है इस विषय पर बात करने से
क्योंकि उन्हें अपने धन 💰 से देना न पड़ जाये
पर मै आपको ये बताना चाहता हूं कि ना तो किसी चर्च और न किसी और की बातें मैं आपको बताना चाहता हूँ पर जो मैं कहना चाहता हूँ वो बाइबल से ही कहना चाहून्गा...
1➡मसीही होने के नाते हम यह समझते है कि सबकुछ परमेश्वर का है जिसमें हमारा पैसा और सम्पति भी शामिल है
2➡कलिसिया को चलाने के लिए और सुसमाचार फ़ैलाने के लिये पैसे की आवश्यकता होती है! कलिसिया को चलाने और सुसमाचार फ़ैलाने के लिए कीमत का भुगतान कौन करेगा? मसीह के अनुयायी!
3➡दशवान्श देना सिर्फ परमेश्वर की दी हूई जिम्मेदारी नहीं परंतु परमेश्वर के लोगों के लिए आशीशो का एक उपाय भी है
l. दशवान्श के सिद्धात
दशवान्श के सिद्धांत परमेश्वर के वचन पर अधारित है कि परमेश्वर सब चिजो का मालिक है, वह हमारे धन और सम्पति का भी अधिकारी है
A. परमेश्वर सब कुछ का मालिक हैं
पृथ्वी और जो कुछ उस में है यहोवा ही का है, जगत और उस में निवास करनेवाले भी।
भजन संहिता 24:1
क्योंकि वन के सारे जीव-जन्तु और हज़ारों पहाड़ों के जानवर मेरे ही हैं। पहाड़ों के सब पक्षियों को मैं जानता हूँ, और मैदान पर चलने फिरनेवाले जानवर मेरे ही हैं। “यदि मैं भूखा होता तो तुझ से न कहता; क्योंकि जगत् और जो कुछ उस में है वह मेरा है।
भजन संहिता 50:10-12
चाँदी तो मेरी है, और सोना भी मेरा ही है, सेनाओं के यहोवा की यही वाणी है।
हाग्गै 2:8
B. मसीही केवल परमेश्वर की सम्तति का प्रबंधक है और परमेश्वर हर एक चीज़ का मालिक है, परमेश्वर हमसे उम्मीद करता है कि उसके प्रबंधक के रूप में उसके प्रति विश्वासयोग्य बने
C. हर मसीही को परमेश्वर के प्रबंधक के रूप में विश्वासयोग्य होना चाहिए
फिर यहाँ भण्डारी में यह बात देखी जाती है कि वह विश्वासयोग्य हो।
1 कुरिन्थियों 4:2
(ii) दशवान्श देने वाले के लिए परमेश्वर की प्रतिग्या
सारे दशमांश भण्डार में ले आओ कि मेरे भवन में भोजनवस्तु रहे; और सेनाओं का यहोवा यह कहता है, कि ऐसा करके मुझे परखो कि मैं आकाश के झरोखे तुम्हारे लिये खोलकर तुम्हारे ऊपर अपरम्पार आशीष की वर्षा करता हूँ कि नहीं।
मलाकी 3:10
A. जो लोग दशवान्श नहीं देते वो परमेश्वर को लूटते है
B. जो लोग दशवान्श नहीं देते वो श्रापित है
C. जो लोग दशवान्श देते हैं उन पर परमेश्वर द्वारा की आशीषो का वादा है, इनमें कुछ आशीषे स्वास्थ्य, बल, और आत्मिक जरूरते भी है.
(iii) दशवान्श कैसे दे?
A. हमें दशवान्श कितना देना चाहिए?
➡दशवान्श 10 रुपये का एक रुपया, 100 ररुपए का 10 होता है यानी कि 10 प्रतिशत होता है. जो भी हो जो हमने कमाया हो, उपहार में मिला, या बचत किया हो, या किसी चिज़ की किमत के अनुसार उसका 10 भाग
B. दशवान्श और भेट में अंतर क्या है?
➡दशवान्श एक निश्चित राशि है जो देने को कहा गया है और भेट अनिश्चित राशि है जो दशवान्श के बाद 90 प्रतिशत में से दी जाती है...भेट की राशि परमेश्वर के आशीषो के अनुसार दी जानी चाहिए...परमेश्वर ये नहीं देखता कि हमने क्या दिया है पर ये देखता है कि देने के बात हमने अपने पास क्या बचाया है...
वह मन्दिर के भण्डार के सामने बैठकर देख रहा था कि लोग मन्दिर के भण्डार में किस प्रकार पैसे डालते हैं; और बहुत से धनवानों ने बहुत कुछ डाला। इतने में एक कंगाल विधवा ने आकर दो दमड़ियाँ, जो एक अधेले के बराबर होती हैं, डालीं। तब उसने अपने चेलों को पास बुलाकर उन से कहा, “मैं तुम से सच कहता हूँ कि मन्दिर के भण्डार में डालने वालों में से इस कंगाल विधवा ने सबसे बढ़कर डाला है; क्योंकि सब ने अपने धन की बढ़ती में से डाला है, परन्तु इसने अपनी घटी में से जो कुछ उसका था, अर्थात् अपनी सारी जीविका डाल दी है।”
मरकुस 12:41-44
C. दशवान्श और भेट कहाँ लाये?
➡परमेश्वर ने कहा दशवान्श परमेश्वर के धर में लाना चाहिए, #मलाकी 3:10
पुराने नियम में दशमान्श परमेश्वर के मंदिर में लाया करते थे, पर आज मसीही लोग अपना दशवान्श अपनी कलिसिया में लाते है, जहाँ वो संगति करते हैं उनके यदि हम ये सोचते हैं कि उस दशवान्श को किसी की मदद कर सकते है तो हम उस दशवान्श से नहीं पर दशवान्श से बचे हुए राशि से कर सकते हैं है, दशवान्श कलिसिया में ही लाना चाहिए.
D. दशवान्श और भेट कब लाये?
➡सप्ताह के पहले दिन तुम में से हर एक अपनी आमदनी के अनुसार कुछ अपने पास रख छोड़ा करे कि मेरे आने पर चन्दा न करना पड़े।
1 कुरिन्थियों 16:2
हमारे लिये सप्ताह का पहला दिन रविवार होता है और रविवार के दिन मसीही लोग मिलते हैं अराधना करते हैं तो इसी दिन...दशवान्श और भेट भी अराधना का एक हिस्सा हैं
E. दशवान्श और भेट चढ़ाते समय हमारा आचरण कैसा हो?
➡परमेश्वर चाहता है कि हम खुशी से दशवान्श और भेट चढाये
हर एक जन जैसा मन में ठाने वैसा ही दान करे; न कुढ़ कुढ़ के और न दबाव से, क्योंकि परमेश्वर हर्ष से देनेवाले से प्रेम रखता है।
2 कुरिन्थियों 9
(iv). दशवान्श देने में समस्याएं
A. डर, की लोग पसंद नहीं करेंगे.
➡दशवान्श के विषय में बहुत सी कलिसिया में नहीं बताया जाता क्योंकि उन्हे डर है कि वो पसंद नहीं करेंगे, बहतर होगा कि हम बोले और परमेश्वर की आशीष लेने दें, चाहे वे इस बात से क्रोधित ही क्यों न हो, यदि हम दशवान्श के विषय में नहीं बतायेन्गे, या झूठ बोलेन्गे तो हम परमेश्वर की आशीषो को लोगों तक बहुचने से वन्चित कर रहे हैं, जो लोग वास्तव में परमेश्वर से प्रेम करते हैं वे इस बारे में सिखाये जाने के बाद क्रोधित नहीं होंगे...
B. विश्वास की मसीही व्यवस्था के अधीन नहीं है
➡कुछ लोग सोचते हैं कि उन्हे दशवान्श नहीं देना चाहिए, क्योंकि वे विश्वास करते हैं कि वह व्यवस्था के अधीन नहीं है लेकिन अब अनुग्रह का समय है
1. लेकिन दशवान्श व्यवस्था के दिये जाने के पहले भी दिया जाता था👇
👉जब वह कदोर्लाओमेर और उसके साथी राजाओं को जीतकर लौटा आता था तब सदोम का राजा शावे नामक तराई में, जो राजा की तराई भी कहलाती है, उससे भेंट करने के लिये आया। तब शालेम का राजा मलिकिसिदक, जो परमप्रधान ईश्वर का याजक था, रोटी और दाखमधु ले आया। और उसने अब्राम को यह आशीर्वाद दिया, “परमप्रधान ईश्वर की ओर से, जो आकाश और पृथ्वी का अधिकारी है, तू धन्य हो। और धन्य है परमप्रधान ईश्वर, जिसने तेरे द्रोहियों को तेरे वश में कर दिया है।” तब अब्राम ने उसको सब वस्तुओं का दशमांश दिया।
उत्पत्ति 14:17-20
और
👉और यह पत्थर, जिसका मैं ने खम्भा खड़ा किया है, परमेश्वर का भवन ठहरेगा : और जो कुछ तू मुझे दे उसका दशमांश मैं अवश्य ही तुझे दिया करूँगा।”
उत्पत्ति 28:22
2. व्यवस्था के समय परमेश्वर ने लोगों को दशवान्श देने को कहा( मलाकी 3:10)
प्रभु येशु ने भी दशवान्श के बारे में बताया( मत्ती 23:23)
3. मसीहो को दशवान्श के सिद्धांत पर जीने में खुशी होनी चाहिए, क्योंकि वे अनुग्रह के अधीन है..प्रभु यीशु जो जीवित है, आज मसीहो से दशवान्श इकठ्ठा करता है👇
👉लेवी की सन्तान में से जो याजक का पद पाते हैं, उन्हें आज्ञा मिली है कि लोगों, अर्थात् अपने भाइयों से, चाहे वे अब्राहम ही की देह से क्यों न जन्मे हों, व्यवस्था के अनुसार दसवाँ अंश लें। पर इसने, जो उनकी वंशावली में का भी न था, अब्राहम से दसवाँ अंश लिया, और जिसे प्रतिज्ञाएँ मिली थीं उसे आशीष दी। इसमें संदेह नहीं कि छोटा बड़े से आशीष पाता है। और यहाँ तो मरनहार मनुष्य दसवाँ अंश लेते हैं, पर वहाँ वही लेता है जिसकी गवाही दी जाती है कि वह जीवित है।
इब्रानियों 7:5-8
पद 8 मसीह के बारे में बताता है
C. धन से प्रेम
पैसा बहुत से विश्वासियो को दशवान्श देने से रोकता है. यह मसीह की देने की आत्मा के विरुद्ध में है, जिसने हमारे लिये सबकुछ दे दिया👇
👉तुम हमारे प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह जानते हो कि वह धनी होकर भी तुम्हारे लिये कंगाल बन गया, ताकि उसके कंगाल हो जाने से तुम धनी हो जाओ।
2 कुरिन्थियों 8:9
D. जब एक पत्नी मसीही है, और पति नहीं है
➡एक स्त्री को जो उसके पति के द्वारा उसके खर्च के लिये दिया जाता है तो उनमे से दशवान्श देना चाहिए,और नौकरी करती है तौभी देना चाहिए
E. दशवान्श से उधार लेना
➡दशवान्श से उधार लेना अच्छी बात नहीं है, लेकिन कुछ लोग ऐसा करते हैं, उनके लिए परमेश्वर ने कहा है कि उधार लिया है तो ब्याज सहित लौटाये
(लैव्यवस्था 27:30-31)
किसी ने कहा कि "पैसा मनुष्य के चरित्र को परखने का अच्छा माध्यम है, यह बताता है कि पैसा कमाने के लिए मनुष्य क्या करता है, और जब मिल जाता है तो वह उससे क्या करता है..
👉क्योंकि रुपये का लोभ सब प्रकार की बुराइयों की जड़ है, जिसे प्राप्त करने का प्रयत्न करते हुए बहुतों ने विश्वास से भटककर अपने आप को नाना प्रकार के दु:खों से छलनी बना लिया है।
1 तीमुथियुस 6:10

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