संदेश

एक शिक्षक, अगुवा, पास्टॄर के प्रति आपका दृष्टिकोण

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जय मसीह की... मेरे प्रिय-भाई बहन आज एक और महत्वपूर्ण बात आपके सामने रखने जा रहा हूँ, आज के समय में ऐसी बहुत सी शिक्षा हमारे सामने देखने है, जो अपने आप को सही साबित करने में लगी हुई है, बहुत सी भ्रमित शिक्षा आज कलिसियाओ में पाई जाती है, लोगों को सिखाया जाता है कि आपको किसी के अधीन रहने की जरूरत नहीं, आपको किसी पास्टर, अगुवे, शिक्षक की जरूरत नहीं है, क्योंकि आपका शिक्षक पवित्रआत्मा(यूहन्ना 14:26, 1कुरि• 2:13)  है तो आपको किसी की सुनने की जरूरत नहीं... लोग (यूहन्ना 14:26 और 1कुरि• 2:13)ऐसे बहुत  से वचन का का हवाला देते हैं, और मना करते हैं कि पवित्रआत्मा को छोड़ शिक्षक, पास्टर, अगुवे के अधीन नहीं  होना है, परन्तु जब विश्‍वास आ चुका, तो हम अब शिक्षक के अधीन न रहे। गलातियों 3:25 👆👆इस वचन को लोग गलत प्रस्तुत करते हैं, जबकी ये वचन 24 में व्यवस्था के बारे में बताती है, क्योंकि विश्वास से पहले व्यवस्था हमारी शिक्षक हुई मसीह तक पहुंचने में ऐसे भरमाने वाले से बचे ये लोग आपको मसीह से  दूर ले जा रहे हैं, मसीह की देह जो कलिसिया है उसकी संगति से ...

दशवान्श और दान

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🙏जय मसीह की🙏 मेरे प्रिय भाई-बहन आज का विषय दशवान्श और दान के बारे में है मेरे प्रियो बहुत से ऐसे लोग हैं जो इस विषय पर बात करना नहीं चाहते हैं, वे हिचकिचाते है इस विषय पर बात करने से क्योंकि उन्हें अपने धन 💰 से देना न पड़ जाये पर मै आपको ये बताना चाहता हूं कि ना तो किसी चर्च और न किसी और की बातें मैं आपको बताना चाहता हूँ पर जो मैं कहना चाहता हूँ वो बाइबल से ही कहना चाहून्गा... 1➡मसीही होने के नाते हम यह समझते है कि सबकुछ परमेश्वर का है जिसमें हमारा पैसा और सम्पति भी शामिल है 2➡कलिसिया को चलाने के लिए और सुसमाचार फ़ैलाने के लिये पैसे की आवश्यकता होती है! कलिसिया को चलाने और सुसमाचार फ़ैलाने के लिए कीमत का भुगतान कौन करेगा? मसीह के अनुयायी! 3➡दशवान्श देना सिर्फ परमेश्वर की दी हूई जिम्मेदारी नहीं परंतु परमेश्वर के लोगों के लिए आशीशो का एक उपाय भी है l. दशवान्श के सिद्धात दशवान्श के सिद्धांत परमेश्वर के वचन पर अधारित है कि परमेश्वर सब चिजो का मालिक है, वह हमारे धन और सम्पति का भी अधिकारी है A. परमेश्वर सब कुछ का मालिक हैं पृथ्वी और जो कुछ उस में है यहोवा ही का है, ज...

मैं अपने पिता से दूर तो नहीं

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🙏सभी लोगों को प्रभु यीशु मसीह के नाम में जय मसीह की🙏 एक बेटा अपने पिता की तारिफ़ अपने दोस्तों के बीच, रिश्तेदारो के बीच अपने मुहल्ले में और भी बहुत से जगह में करता है, वो कहता है अपने पिता के प्रेम के बारे में कि उसका पिता उससे कितना प्रेम करता है, वो बेटा अपने पिता की हर एक वो बात जो उसका पिता उसके लिये करता है बताता रहता है, वो बेटा सारे लोगों के बीच ये कहता है कि उसका पिता उसकी हर जरूरतो को पूरा करता है, उसे जो चाहिए उसका पिता उसे लाकर देता है, वो बेटा अपने पिता कि हर एक अच्छाई को लोगों को बताया करता है, उसे अच्छा लगता अपने पिता के बारे में लोगों को बताने में, हर दिन कुछ न कुछ उस बेटे के पास होता ही है अपने पिता के बारे में  लोगों को बताने के लिए और वो लोगों के पास जाया करता है, मैं आपसे सवाल करना चाहता हूं कि वो बेटा जो अपने पिता की तारिफ़ किये थकता नहीं है क्या वो एक अच्छा बेटा हो सकता है???🤔🤔 हाँ वो एक अच्छा बेटा हो सकता है✅ जरा सोचे कि वो ही बेटा जो हर दिन अपने पिता की तारिफ़ लोगों के पास जाकर करता है वो बेटा हर दिन अपने पिता के साथ समय नही बिताता है, अपने पिता...

मनुष्य परमेश्वर को प्रकट नहीं कर सकता, परमेश्वर खुद प्रकट होता आया

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मेरे प्रिय भाई-बहन एक बात आप से कहना चाहता हूँ कि बिते दिनो मेरे एक पोस्ट में काफ़ी बहस हुई थी, जिसमें अन्य आस्था से जुड़े किसी ने ये सवाल कर दिया था कि परमेश्वर को प्रकट करो वो है तो उनका कहना था कि यीशु मर चुका है वो परमेश्वर नहीं है, परमेश्वर का कोई रूप नहीं है वो प्रकाश है, सर्वशक्तिमान मान है, ग्यानी है, उसे कोई नहीं देख सकता है, उनका सवाल था अगर वो है तो दिखाओ.... वैसे तो मैं जवाब दे सकता था पर नहीं दिया मैने इसलिये कि जब एक बात कर रहा हो तो उसके बीच में बिना उसके इज़ाज़त के आना अच्छी बात नहीं होती वरना दोनों की अलग अलग बातों को समझाने का तरिका अलग अलग होता है...तो मैं चुप रहा.. मैं अक्सर उनके सवालो से जानता हूँ कि जिस परमेश्वर की अराधना हम करते हैं उसका कोई अस्थित्व नहीं है... क्योंकि मैं वचन से प्रमाणित तो कर सकता था, लेकिन हर बार वचन का सहारा लेना ऐसे लोगों के लिए सही नहीं वरना आपके वचन को तो व्यर्थ समझेगा ही साथ ही साथ आपके द्वारा परमेश्वर के का अपमान भी होगा, वैसे लोगों ने तो परमेश्वर का अपमान तो किया ही है पर मैं ऐसा मानता हूं कि परमेश्वर के वचन जिसे हम जीवन मानते है वो...

सही और गलत का चुनाव

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जय मसीह की मेरे प्रिय भाई-बहन आज एक और नया विषय आपके सामने रख रहा हूँ... जो परमेश्वर के द्वारा एक नयी बात पता चली...प्रभु की कितना महान है, जब तो बात करता है तो सच में सुनने वाले भी उसके वचन से आनंदित और आशीषित जरूर होते हैं, मैं बहुत उत्साहित और विश्वास के साथ आपसे बात करने जा रहा हूँ...आप ध्यान से पढ़े क्योंकि परमेश्वर का आत्मा आपसे बात करने जा रहा है... मैं आपको साफ़ शब्दों में बताना चाहता हूं कि परमेश्वर और परमेश्वर का काम सही है, परमेश्वर अपना काम सही तरीके से करता है और वो चाहता है कि उसके लोग भी सही चाल और सही रिति से चले क्योंकि परमेश्वर सही है तो परमेश्वर के लोग भी सही बने... आपने बाइबल में यशायाह भविष्यवक्ता के बारे मे पढा होगा, जो कि प्रभु यीशु के जन्म से 700 साल पहले ये भविष्यवाणी की थी कि यीशु का जन्म किस प्रकार से होगा.... मैं आपको इसी पुस्तक में से एक व्यक्ति के बारे में बताने वाला हूं आप मेरी बात पर गौर करे... हम इस बात को जानते हैं कि शैतान जब स्वर्ग में परमेश्वर की अराधना करता था तो वो एक स्वर्ग्दुत था, और परमेश्वर ने उसे बहुत सुंदर भी बनाया था...जब तक वो ...

एक अच्छा पात्र बनना

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"जय मसीह की" मेरे प्रिय भाई-बहनो मैं आपके सामने एक और विषय पे  बात करने जा रहा हूँ 👉मसीह में एक अच्छा पात्र बनना मेरे प्रियो हम परमेश्वर से क्या चाहते हैं??? 60%- लोग परमेश्वर से कहते हैं मुझे दें(लेने वाले) 30%-लोग कहते हैं परमेश्वर मेरा इस्तेमाल कर. 10% -लोग कहते हैं परमेश्वर मुझे बना कि मैं काम आऊ. याद रखिये मेरे प्रियो परमेश्वर पहले बनाता है कि इस्तेमाल किया जाये या इस्तेमाल में लाया जाये परमेश्वर ने हमें चुना है कि हम परमेश्वर के लिये इस्तेमाल किये जाये, जैसे एक कुम्हार पात्र बनाने से पहले मिट्टी को चुनता है, वैसे ही परमेश्वर ने भी हमें इस्तेमाल करने  से पहले हमें बुलाया गया है कि हम चुने जाये जैसे कुम्हार मिट्टी को गुथा/साना करता है उसे दबता है कि वो नरम बन जन जाये ताकि उसे जिस आकार में ढाले उस आकार में वो धलता जाये ठिक वैसे ही परमेश्वर भी हमें पहले नम्र, दीन, दयालु, बुराई को अलग कर हमारे अंदर प्रेम को उत्पन्न करता है कि हम हर परिस्थिति में ढल सके.... जैसे. कुम्हार पात्र बनाते समय आकार दिया करता है वैसे ही परमेश्वर भी हमें उसी प्रकार बनाता है अपनी...

परमेश्वर का वचन(बाइबल) जो अब बदलती जा रही है

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जय मसीह की मेरे प्रिय भाई-बहन मैं आज आपके सामने कुछ खास विषय पर बात करने वाला हूं 👉परमेश्वर का वचन(बाइबल) हम तक पहुँची🤔?? कैसे मैं जानता हूँ कि बहुत से लोग इस बात को जानते हैं फ़िर भी मैं आपको इसके बारे में कुछ बातों को बताता चाहता हूँ अगर हम उत्पत्ति की किताब से पढना शुरू करते हैं तो पाते हैं कि परमेश्वर द्वारा संसार की सृष्टि  और कैसे मनुष्य का पापी होना और जल-प्रलय और अनेक प्रकार की भाषा और जाती बनी इसका वर्णन और अब्राहम के वंशजों को पाते हैं अगर हम नज़र डाले उत्पत्ति की किताब से तो पाते हैं कि परमेश्वर का वचन (व्यवस्था,नियम, आग्या), और वाचा को परमेश्वर द्वारा लोगों तक मौखिक रूप में दिया जाता था उन दिनों लिखने का चलन अस्थित्व में नहीं आया था... और जब निर्गमन की किताब में आते हैं तो पाते हैं कि परमेश्वर कैसे मुसा का इस्तेमाल किया अपने लोगों को मिस्र की गुलामी से निकाल लाया और मैं ऐसा मानता हूं कि मुसा के समय में लिखने का प्रचलन आ चुका था और परमेश्वर ने अपनी बातों को लिखित रूप में बदला और मुसा द्वारा पन्चग्रंथ  जिसे इब्रानी भाषा में तोराह(व्यवस्था) कहते हैं जिसम...

नूह के दिनों का जल-प्रलय और अंत के दिनों में होने वाली घटना जो बाइबल हमें पहले से बताया करती है

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जय मसीह की आज मैं आपके सामने संसार की उत्पत्ति और कुछ घटना को देखेंगे जो परमेश्वर द्वारा की गई थी और होने वाली है.. ये आपको पता ही होगा की परमेश्वर ने दुसरे दिन क्या किया ?🤔 उत्पत्ति 1:6‭-‬8 फिर परमेश्‍वर ने कहा*, "जल के बीच एक ऐसा अन्तर हो कि जल दो भाग हो जाए।" तब परमेश्‍वर ने एक अन्तर करके उसके नीचे के जल और उसके ऊपर के जल को अलग-अलग किया; और वैसा ही हो गया। और परमेश्‍वर ने उस अन्तर को आकाश कहा। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार दूसरा दिन हो गया। जैसा कि हम जानते हैं कि परमेश्वर ने जल को दो भाग किया जिसमे निचे के जल से उपर के जल में अंतर कर अलग किया, लेकिन उपर का जल गया कहा जिसे परमेश्वर ने आकाश कहा🤔🤔🤔🤔 मैं आपको बताना चाहता हूँ कि जिस जल को परमेश्वर ने आकाश कहा था वो जल वायुमण्डल मे रह गया, जिसने तरह-तरह के गैस पाये जाते हैं, मतलब वो हवा में रह गया, और परमेश्वर ने इसका इस्तेमाल नुह के दिनों में किया. अगर हम नज़र डाले उत्पत्ति 2:5 वचन में तो वहाँ इस प्रकार लिखा है तब मैदान का कोई पौधा भूमि पर न था, और न मैदान का कोई छोटा पेड़ उगा था, क्योंकि यहोव...
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मेरे प्रियो जय मसीह की...... भाई-बहनो आपने परमेश्वर के वचन को पढ़ा होगा  और पढ़ते भी हो, अध्य्यन भी करते हो अच्छी बात है. क्या आप एक बात जानते हो कि परमेश्वर ने जिन्हे चुना था जैसे अब्राहम, हनोक, मुसा, एेलिय्याह जैसे और भी थे जो परमेश्वर के संग-संग चला करते थे, न वो अपनी मर्जी से आगे और न ही पिछे चलते थे.... मुझे आपको ज्यादा समझाने की जरूरत नहीं है क्योंकि आप इस पिक्चर के मध्य्यम से समझ जाओगे.... मैं बताना चाहता हूँ कि जब एक बच्चा जब अपने पिता की उंगलियों को थाम कर चलता है तो उस बच्चे की चलते वक्त प्रतिक्रिया क्या-क्या होती होगी?🤔🤔 जैसे कि वो बच्चा चलते-चलते अपने पिता की उंगलियों छोड़कर भाग जाता होगा, कभी दौड़ता होगा, कभीचलते-चलते रुक जाता होगा, या फ़िर वो अपने पिता की चलने की गति को देखकर खुद पिता से तेज़ चलने की कोशिश करता होगा, कभी कभी साथ चलते-चलते रास्ते में कुछ आ जाये तो उसे ठोकर मार देता होगा, कभी कुदना शुरू करना है तो कभी बैठ जाता है, कभी-कभी वो पिता की उंगलियों को थामे तो रहता है पर चलना नहीं चाहता है... एक बच्चे में हम ऐसी-ऐसी बातों को देखते हैं, आप भी ए...

प्रसाद खाने और रक्षाबंधन के विषय में

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जय मसीह की मेरे प्रिय भाई-बहन जब कोई अन्य आस्था से जुड़ा व्यक्ति जब आपको प्रसाद दे खाने को तो आप क्या करते हो? आपकी प्राकिक्रिया क्या होती हैं उस समय? कुछ भाई बहन तो साफ़ इंकार कर देते हैं इसे हम नहीं ले सकते हैं, कि हमारा विश्वास इन सब में नहीं है, और कुछ भाई बहन ये सोचकर ले लेते है कि हम इसे प्रसाद के रूप में नहीं खाते इसे हम मीठाई या खाने की वस्तु के रूप में खाते है, या अपने पडोसी मित्र, से उसका दिल रखने के लिये ले लेते है की वो बुरा मान जायेगा, ऐसा सोच अक्सर देखा जाता है हम मनुष्यो में और ये सोच रखते हैं कि हम अपने पडोसी से प्रेम रकते है, पर  ये गलत है, वचन कहता है- अत: मूर्तियों के सामने बलि की हुई वस्तुओं के खाने के विषय में - हम जानते हैं कि मूर्ति जगत में कोई वस्तु नहीं, और एक को छोड़ और कोई परमेश्‍वर नहीं। यद्यपि आकाश में और पृथ्वी पर बहुत से ईश्‍वर कहलाते हैं - जैसा कि बहुत से ईश्‍वर और बहुत से प्रभु हैं - 1 कुरिन्थियों 8:4‭-‬5 तौभी हमारे लिये तो एक ही परमेश्‍वर है : अर्थात् पिता जिसकी ओर से सब वस्तुएँ हैं, और हम उसी के लिये हैं। और एक ही प्रभु है, अर्थात् यीशु ...

हर एक परमेश्वर की संतान नहीं

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"जय मसीह की" मेरे प्रियो आप के बीच एक और विषय लेकर आया हूं प्रियो, मैं आप सब से एक बात को कहना चाहता हूँ कि अगर आप सच में परमेश्वर के साथ एक रिश्ते में बंधना चाहते हैं तो आप अपने जीवन में जो भी रुकावटे है सबसे पहले उसे दूर करे, मैने देखा है ऐसे भाई-बहनो को जो कहते है कि परमेश्वर से प्रेम करते हैं और दूसरी तरह संसारिक  मोहमाया में फ़से हुए है, एक तरफ़ आप परमेश्वर के साथ रिश्ता जोड़ रहे हो और दूसरी तरफ आप संसार के अधीन हो ये कैसी परमेश्वर की सेवा है, मैने देखा है आपको बुरा लगे तो लगे पर सच है....लोगों के प्रोफ़ाइल मे फ़िल्मी सितारो की, क्रिकेटर, सिरियल्स सितारो, गायक, नेता, और भी ना जाने कैसे कैसे लोगों के तस्वीर को लगा के रखे हैं, जिससे की साफ़ देखा जा सकता है कि आपका झुकाव किससे तरफ़ है, ऐसा कर के आप साफ़ ये जताते हो कि आप अपने मन में उसे कितना महोत्व दे रहे हो, कितना आदर मान, सम्मान दे रहे हो, आप अपने हिर्दय में उसे इतना जगह दे चुके हो और वो भी आपके हिर्दय में बना चुका है, ऐसी स्थिति में आप चाहे, कर्मो से,होंठों से सेवा भक्ति से जितना परमेश्वर को खुश करना चाहो आ...

आशीष का कारण बनना

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जय यीशु मसीह की.... आज मैं जिस विषय पर बात करने वाला हूं जो कि काफ़ी विवादित और तर्क वाला होता है.... तो आईये हम उस वचन की ओर चलते हैं-  1 कुरिन्थियों 11:3-16 [3]सो मैं चाहता हूं, कि तुम यह जान लो, कि हर एक पुरूष का सिर मसीह है: और स्त्री का सिर पुरूष है: और मसीह का सिर परमेश्वर है। [4]जो पुरूष सिर ढांके हुए प्रार्थना या भविष्यद्वाणी करता है, वह अपने सिर का अपमान करता है। [5]परन्तु जो स्त्री उघाड़े सिर प्रार्थना या भविष्यद्ववाणी करती है, वह अपने सिर का अपमान करती है, क्योंकि वह मुण्डी होने के बराबर है। [6]यदि स्त्री ओढ़नी न ओढ़े, तो बाल भी कटा ले; यदि स्त्री के लिये बाल कटाना या मुण्डाना लज्ज़ा की बात है, तो ओढ़नी ओढ़े। [7]हां पुरूष को अपना सिर ढांकना उचित नहीं, क्योंकि वह परमेश्वर का स्वरूप और महिमा है; परन्तु स्त्री पुरूष की महिमा! [8]क्योंकि पुरूष स्त्री से नहीं हुआ, परन्तु स्त्री पुरूष से हुई है। [9]और पुरूष स्त्री के लिये नहीं सिरजा गया, परन्तु स्त्री पुरूष के लिये सिरजी गई है। [10]इसीलिये स्वर्गदूतों के कारण स्त्री को उचित है, कि अधिकार अपने सिर पर रखे। [11]तौभ...

मनो में स्थापित मुृर्ति

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जय मसीह की मेरे प्रियो अगर एक मसीह को मानने वाले से ये सवाल किया कि क्या आप मुर्ति पुजा करते हैं? तो उनका जवाब होगा नहीं मैं नहीं करता हूँ, अगर मैं आपको ये कहूं कि ज्यादातर मसीह पर बिश्वास करने वाला मुर्ति पुजा करता है तो आपका क्या कहना होगा? आईये बाइबल की कुछ आयतो पर ध्यान को क्रेन्द्रित करते हैं "फिर वह थोड़ा और आगे बढ़कर मुँह के बल गिरकर, और यह प्रार्थना करने लगा, “हे मेरे पिता, यदि हो सके, तो यह कटोरा* मुझसे टल जाए, फिर भी जैसा मैं चाहता हूँ वैसा नहीं, परन्तु जैसा तू चाहता है वैसा ही हो।” मत्ती 26:39 आप जानते होंगे कि ये वचन किससे विषय में है यहाँ ध्यान देने वाली बातें है कि येशु को पता था कि वो कौन सा समय आने वाला है, लेकिन येशु शरीर के भाव में था उसे घबराहट बेचैनी हुई उसे पता था जो होने वाला है उसके साथ येशु परमेश्वर के सामने अपनी इच्छा को रखता है  इसमे भी बड़ी बात ये है कि येशु अपनी इच्छा कहने के बाद भी परमेश्वर से ये कहता कि  मेरी नहीं तेरी इच्छा पुरी हो..... मेरा कहने का मतलब ये है कि जब हम परमेश्वर के सामने आते हैं तब हम अपनी इच्...

पति और पत्नी

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जय मसीह की मैने इस कैंची को अधार बना कर एक पति-पत्नी के रिश्ते को दर्शाने की कोशिश की है..... आप खुद सोचिये ये जो कैंची है इसके बीच कुछ भी आ जाये तो ये क्या करेगा? ये काटते हुए आगे बढ़ते चला जायेगा..... कैंची की धार पति-पत्नी के बिश्वास को दर्शाता है, किसी एक में भी अगर बिश्वास की कमी एक दूसरे के प्रति दिखाई तो ये जीवन ठिक तरह से चल नहीं पायेगा....न ही किसी भी परिस्थिति को ठिक तरह से हल कर पायेगा... एक दूसरे पर बिश्वास, भरोसा का होना बहुत जरूरी है, किसी भी तरह का परेशानी क्यों न हो......जो एक वैवाहिक जीवन को बर्बाद कर सकता है उसे अपने वैवाहिक जीवन में प्रबल न होने दें....पति-पत्नी दोनों ही आपसी सुझ-बूझ के द्वारा मिलकर इन सब का सामना करे..... अगर कैंची का एक भाग या फ़िर हम कहे कि पति से पत्नी या पत्नी को पति से अलग कर दिया जाये तो क्या वो एक दूसरे के बिना चल सकेंगे? वचन भी इस बात को बताता है उत्पत्ति 2:24 कि "वे दोनों एक ही तन बने रहेंगे" ये वचन सिर्फ़ शारीरिक संबंध को ही नहीं बताता है, ये वैवाहिक जीवन के हर एक पहलु को बताता है जो पति-पत्नी के बीच प्रेम बिश्वा...

हम कहाँ है?

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जय मसीह की मेरे प्रिय भाई बहन आज मैं आपके सामने कुछ बात को रखना चाहता हूँ जरा ध्यान से पढ़े, हम सब जानते हैं कि हमारे मोबाइल 📱 फोन में एक एप आता है जिसे हम गूगल मैप(google map) कहते हैं, और हमारे मोबाइल 📱 में एक ट्रकर( tracker) लगा होता जिसके माध्यम से अपनी लोकेशन(location) का पता लगा सकते हैं की किस जगह पर है, या एप(apps) गूगल मैप (google map) के द्वारा हम किसी भी जगह का पता लगा सकते है या उस जगह तक बहुत ही आसानी से पहुँचा जा सकता है.... इसके द्वारा हम अपने लोगों की गतिविधि या आस-पास के जगह का पता लगा सकते हैं या किसी पर नज़र भी रख सकते हैं.... मेरे प्रियो ये सब चीजे तो मनुष्य द्वारा बनाई गई है, मनुष्य की सुविधा के लिए इस्तेमाल किया जाये... ये सब तो संसारिक बातें है आप सब जानते ही है... आज मैं पुछ्ना चाहता हूँ कि आज हमारा आत्मिक जीवन कहाँ है? हम कहाँ है? क्या हम अपने आपको देख सकते हैं कि हमारा जीवन किस तरफ़ चला जा रहा है, क्या हम इसका अन्दाज़ लगा सकते हैं कि हमारा क्या होने वाला है? चलिये मैं ले चलता हूं आपको आदम के समय में जब आदम ने पाप किया था... उत्पत्ति 3:...

मनुष्य खुद की अभिलाषा में फ़सकर पाप करता है

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जय मसीह की मेरे प्रियो आज एक और विषय :- अक्सर देखा जाता है कि लोग कहते हैं कि मैं तो पाप करना नहीं चाहता था लेकिन शैतान ने मुझ से पाप करवा दिया, अब क्या कहे कि इसमें मनुष्य की कोई गलती नही है? सारा गलती शैतान की ही है उसी के कारण पाप हो गया, ये बात सही नहीं है शैतान मनुष्य से पाप नहीं कराता मनुष्य खुद ही अपनी इच्छा/ अभिलाषा के  कारण पाप में गिरता है, जरा सोचिये जब लुसिफ़र(शैतान) स्वर्ग में था तब उसके मन में जो घमंड उत्पन्न हुआ, जिसके द्वारा वो परमेश्वर के सामने विद्रोह कर गया कि वो भी परमेश्वर से बड़ा बनेगा, और बहुत से स्वर्गदूतो को भरमाकर अपने तरफ़ कर लिया था, अब आप ही बताइये कि वो पाप कैसे कर गया, क्या उसे भी किसी ने पाप करवाया था? नहीं न तो फ़िर ये कैसे कह सकते हो कि शैतान पाप करवा दिया, परमेश्वर ने लुसिफ़र(शैतान) को एक स्वर्गदूत के रूप में बनाया था तब परमेश्वर ने उसके अन्दर भी  वो स्वतन्त्र इच्छा दी थी की वो अपना चुनाव कर सकता है, पर शैतान ने इसका गलत इस्तेमाल कर  परमेश्वर की दृष्टि मे पाप किया... वैसे ही परमेश्वर ने मनुष्य को भी स्वर्गदूतो से उत्तम बनाय...

हमारा परमेश्वर कौन?

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👉जवानो के लिये ➡जवान खुद विचार कर ले कि वो किसकी उपासना करना चहता है और करता है. कौन उसे मृत्यु के बंधन से छूड़ा सकता है. कौन उसे  नया जीवन दे सकता है. कौन उसे  हर दिन एक नई आशा देता है. बाइबल बताता है कि यीशु(परमेश्वर) कहता है- "यदि तुम मुझ से प्रेम रखते हो, तो मेरी आज्ञाओं को मानोगे। यूहन्ना 14:15 तो एक तरफ़ परमेश्वर से कहते तो हो कि प्रेम करते हैं क्या उस प्रेम को आग्या के द्वारा करते हो? सभोपदेशक अध्याय 12:1 "हे जवान अपनी जवानी के दिनों में अपने सिर्जनहार(परमेश्वर) को स्मरण(याद) रख, हे जवान, अपनी जवानी में आनन्द कर, और अपनी जवानी के दिनों के मगन रह; अपनी मनमानी कर और अपनी आंखों की दृष्टि के अनुसार चल। परन्तु यह जान रख कि इन सब बातों के विषय में परमेश्वर तेरा न्याय करेगा॥ सभोपदेशक 11:9 👉जो मुझ से प्रेम रखते हैं, उन से मैं भी प्रेम रखती हूं, और जो मुझ को यत्न से तड़के उठ कर खोजते हैं, वे मुझे पाते हैं। नीतिवचन 8:17 जवानो इस वचन पर ध्यान लगाओ कि ये वचन किस बारे में कह रहा है.... अब आप खुद ही विचार करे की आप किससे प्रेम करते हो....अगर वचनरूपी परमेश्...

नये विश्वासी ध्यान दें

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मसीह में नये विश्वासी भाई बहन मैं आप से बातें कह रहा हूं, आप जरूर इस बात का ध्यान रखें }जब आप नये-नये मसीह में आते हो तो आप एक नये जनमाये बच्चे के समान होते हो, आपको प्रभु में नये मार्गदर्शन की जरूरत होती है, जो कि आपको प्रभु में बढ़ने में आपकी सहायता करे, आपको बताये, समझाये और सिखाये, ताकि आप मसीह में अपना जड़ पकड़े रहो, जब आप प्रभु में नये होते हो तो आपका जोश प्रभु में अलग अलग है, आप चाहते हो कि प्रभु को प्रसन्न करने के लिए मैं क्या ना करू, आप बहुत जोशिले और उत्साहित भी होते हो कि आप प्रभु के लिये काम करो... पर बहुतो का ऐसा ही विश्वास कुछ दिनों बाद ठंडा पड़ जाता है, क्या आप जानते हो कि ऐसा क्यों होता है? 👉इसका जवाब है: जब आपने प्रभु से मांगा कि प्रभु में बढ़ने के लिये मेरी सहायता करे....आप प्रार्थना करते भी है और प्रार्थना करवाते भी है...लेकिन अक्सर इस बात में चुक जाते हैं हमारे नये बिश्वासी भाई बहन की किसी पर भी भरोसा कर लेते हैं जो अपने आपको प्रभु में होने का दावा करता है....गलती यही पर हो जाती है....और शैतान अपना काम ऐसे लोगों के द्वारा आपके जीवन में बहुत ही तेज़ी से क...

मसीह में एक दूसरे के अंग बनो

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मेरे प्रिय भाई-बहने आप सब कैसे हो? आशा करता हूँ कि आप सब प्रभु में अच्छे भले होंगे, क्योंकि वचन भी इस कि "प्रभु में सदा आनंदित रहो" मेरे प्रियो मैं कुछ बातों को आपके सामने रखना चाहता हूँ जैसा कि निचे वचन में लिखा है कि मसीह में एक देह होकर आपस में एक दूसरे के अंग है... मैं कहना ये चाहता हूँ कि जैसे हमारे देह में अलग-अलग अंग है और इनके काम करने का तरिका भी एक दूसरे से अलग है, पर ये अंग एक दूसरे के विरोध में नहीं है, और ये एक दूसरे की सहायता भी करते हैं... लेकिन हम भी तो मसीह में एक दूसरे के अंग है, तो हमारा विचार काम करने का तरिका एक दूसरे से अलग हो सकते हैं, पर हमें बात-बात में किसी का विरोध नही करना चाहिये, हमें एक दूसरे की सह लेनी चाहिये, मदद करनी चाहिए, क्युन्कि हम मसीह में एक दूसरे के अंग कहलाते है, हम अपने शरीर के अंगों से सीख सकते हैं, कि कैसे वो काम करता है बिना किसी का विरोध किये, और ये एक दूसरे से जुड़े हुए हैं, और  सम्पूर्ण शरीर बनता है, हम जब कभी भी किसी से बात करते हैं तो हमें इस बात का ध्यान जरूर रखना चाहिए कि जब बताने या समझाने की बात होती है तो सब की...

अनजाने में होनेवाली गलतियां

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कभी कभी हम गलत का साथ दे देते हैं जो कि कभी-कभी हमें पता भी नही चलता है जैसे कि- फ़ेसबुक और व्हाटअप को ले लेते हैं, हम बहुत बार बहुत सी गलत पोस्ट, या कमेंट्स को #लाईक दे देते हैं, मतलब की हम उसे पसंद कर रहे हैं, उस बुराई का हम साथ दे रहे हैं, किसी के गलत कमेंट्स का भी हम साथ देते हैं लाईक करते हैं, और तो और समजाने की बजाय हम अपने जवाब देकर उसकी सराहना(तारीफ़) करते हैं, बहुत बार मैने भी किया है, आप ने देखा भी होगा, हम तो जन्म से पापी है तो पाप का स्वभाव तो हमारे अंदर होगा ही, तो ऐसे-ऐसे लक्ष्मण तो दिखेन्गे ही हमारे में...किसी का मज़ाक बना देते हैं  बातों बातों में...फ़नी वीडियो, जोक्स, को एक दूसरे को #send करने में बड़ा मज़ा आता है, हंसते है हंसाते है, किसी का कोई मज़ाज बना रहा होता हुआ देख बड़ा मज़ा लेते हैं, घर पर या अपने दोस्तों के बीच हमारे नाम बड़े मश्हूर होते हैं, मुझे भी दोस्तों ने बहुत से नाम दिये है, मैने भी रखे है दोस्तों के नाम, जो मन मे आया रख दिया जब हम सहभागिता रखते हैं चर्च में, घर में, स्कुल, कॉलेज,ऑफिस, दोस्तो के बीच तो कभी कभी किसी के खुबसुरती को लेकर, पहनावा को ...