एक शिक्षक, अगुवा, पास्टॄर के प्रति आपका दृष्टिकोण
जय मसीह की... मेरे प्रिय-भाई बहन आज एक और महत्वपूर्ण बात आपके सामने रखने जा रहा हूँ, आज के समय में ऐसी बहुत सी शिक्षा हमारे सामने देखने है, जो अपने आप को सही साबित करने में लगी हुई है, बहुत सी भ्रमित शिक्षा आज कलिसियाओ में पाई जाती है, लोगों को सिखाया जाता है कि आपको किसी के अधीन रहने की जरूरत नहीं, आपको किसी पास्टर, अगुवे, शिक्षक की जरूरत नहीं है, क्योंकि आपका शिक्षक पवित्रआत्मा(यूहन्ना 14:26, 1कुरि• 2:13) है तो आपको किसी की सुनने की जरूरत नहीं... लोग (यूहन्ना 14:26 और 1कुरि• 2:13)ऐसे बहुत से वचन का का हवाला देते हैं, और मना करते हैं कि पवित्रआत्मा को छोड़ शिक्षक, पास्टर, अगुवे के अधीन नहीं होना है, परन्तु जब विश्वास आ चुका, तो हम अब शिक्षक के अधीन न रहे। गलातियों 3:25 👆👆इस वचन को लोग गलत प्रस्तुत करते हैं, जबकी ये वचन 24 में व्यवस्था के बारे में बताती है, क्योंकि विश्वास से पहले व्यवस्था हमारी शिक्षक हुई मसीह तक पहुंचने में ऐसे भरमाने वाले से बचे ये लोग आपको मसीह से दूर ले जा रहे हैं, मसीह की देह जो कलिसिया है उसकी संगति से ...